तिरुवल्लूर गैस रिसाव हादसे की पुनरावृत्ति नहीं होने देंगे : मोहम्मद परवेज़

चेन्नई : तमिलनाडु विधानसभा के तीसरे दिन सोमवार को तिरुवल्लूर जिले में स्थित एक समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई में अमोनिया गैस रिसाव से हुई पांच श्रमिकों की मौत का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। श्रम कल्याण विभाग के मंत्री मोहम्मद परवेज़ ने विधानसभा में सरकार की ओर से विस्तृत वक्तव्य देते हुए आश्वासन दिया कि तिरुवल्लूर जैसी दुखद औद्योगिक दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार सभी आवश्यक और कड़े सुरक्षा उपाय लागू करेगी।

 

विधानसभा की कार्यवाही सुबह 9:30 बजे प्रारंभ हुई। इस दौरान मंत्री मोहम्मद परवेज़ ने नियम 110 के तहत बयान देते हुए तिरुवल्लूर जिले के ऊथुकोट्टई तालुक अंतर्गत कन्निगैपेर गांव में स्थित सेंट पीटर एंड पॉल सी फूड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में हुई दुर्घटना की जानकारी सदन के समक्ष रखी।

 

उन्होंने बताया कि रविवार को फैक्ट्री परिसर में स्थापित आइस फ्लेक्स जनरेटर मशीन को जाने वाली पाइपलाइन के वाल्व में अचानक तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण अमोनिया गैस का रिसाव हुआ। गैस रिसाव के समय फैक्ट्री परिसर और श्रमिक आवास क्षेत्र में मौजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए।

 

मंत्री के अनुसार, इस दुर्घटना से कुल 74 लोग प्रभावित हुए, जिनमें 70 महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं। प्रभावित लोगों को तत्काल विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 15 मरीज सरकारी अस्पतालों में तथा 27 मरीज निजी अस्पतालों के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती हैं, जहां उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसके अतिरिक्त 27 अन्य लोग सामान्य चिकित्सा उपचार प्राप्त कर रहे हैं।

 

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी प्रभावित श्रमिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे और गंभीर रूप से घायल मरीजों की विशेष निगरानी की जाए।

 

उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना में पांच महिला श्रमिकों की मृत्यु हो गई, जिससे राज्य सरकार गहरे दुख में है। मुख्यमंत्री ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है और मुख्यमंत्री सार्वजनिक राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को दो-दो लाख रुपये की तत्काल सहायता देने की घोषणा की है।

 

मंत्री ने यह भी बताया कि मृत श्रमिकों के पार्थिव शरीरों को उनके गृह राज्यों तक सम्मानपूर्वक पहुंचाने तथा अंतिम संस्कार की संपूर्ण व्यवस्था का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसके अलावा घायलों को कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) तथा कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) से संबंधित लाभ शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

 

दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक, जनस्वास्थ्य विभाग के निदेशक तथा तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इन रिपोर्टों के आधार पर दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पहचान कर जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 

मंत्री मोहम्मद परवेज़ ने कहा कि राज्य सरकार इस घटना को गंभीरता से ले रही है और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में वर्तमान में 54,957 फैक्ट्रियां संचालित हैं, जिनमें लगभग 27.65 लाख श्रमिक कार्यरत हैं। इनमें से 6,669 इकाइयां खतरनाक श्रेणी के उद्योगों में शामिल हैं, जहां सुरक्षा मानकों का विशेष महत्व है।

 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर के सभी खतरनाक उद्योगों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। विशेषज्ञों और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम सुरक्षा मानकों, गैस भंडारण व्यवस्था, आपदा प्रबंधन प्रणाली, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र तथा श्रमिक सुरक्षा उपायों की समीक्षा करेगी। जहां भी कमियां पाई जाएंगी, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

 

मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि औद्योगिक विकास और श्रमिक सुरक्षा दोनों राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने कहा कि तिरुवल्लूर की घटना से मिले सबक के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।————–

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