‘संविधान हत्या दिवस’ पर उपराष्ट्रपति समेत केंद्रीय मंत्रियों ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय

नई दिल्ली : ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत शीर्ष नेताओं ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आपातकाल संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की कठिन परीक्षा का दौर था, जब नागरिक स्वतंत्रताएं निलंबित कर दी गई थीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई थी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया था। उन्होंने संविधान के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने की अपील की।

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का हनन किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को कुचला गया और हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों तथा नागरिकों को जेलों में डाला गया। उन्होंने कहा कि यह दिवस लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करने का अवसर है।

 

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेस के सत्ता के अहंकार ने संविधान की आत्मा, प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार को कुचलने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ का उद्देश्य इस घटना को राष्ट्रीय स्मृति में जीवित रखना और भविष्य में लोकतंत्र पर ऐसे आघात की पुनरावृत्ति रोकना है।

 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 25 जून 1975 वह दिन था जब सत्ता के अहंकार ने संविधान की आत्मा को कुचलते हुए देश पर आपातकाल थोप दिया। उन्होंने कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के राष्ट्रीय दायित्व की याद दिलाता है।

 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि दशकों तक आपातकाल के अध्याय को देश की सामूहिक स्मृति से मिटाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लेकर इतिहास के साथ न्याय किया गया।

 

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा आघात बताते हुए कहा कि उस दौर में नागरिक अधिकारों का हनन हुआ, प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को गहरी चोट पहुंची।

 

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आपातकाल ने संविधान की मूल भावना, नागरिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर आघात पहुंचाया। उन्होंने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों को नमन किया।

 

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 1975 में लगाया गया आपातकाल लोकतांत्रिक मूल्यों पर सबसे बड़े प्रहारों में से एक था। उन्होंने कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ लोकतंत्र सेनानियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के संघर्ष, साहस और बलिदान को स्मरण करने का अवसर है।

 

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की याद में हर वर्ष 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह दिन उन लोगों के संघर्ष और बलिदान को याद करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाई थी।

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