नई दिल्ली : भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (एनएसओ) के प्रमुखों की बैठक 3 से 4 अगस्त को लखनऊ में होगी। ‘परिवर्तन का प्रेरक: गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी’ विषयक इस बैठक में सांख्यिकी उत्पादों को मजबूत करने, राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों में सुधार, आंकड़ों के प्रसार और उपलब्धता बढ़ाने, मैक्रो-आर्थिक व क्षेत्रीय सांख्यिकी को सुदृढ़ करने पर चर्चा होगी।
केद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने बताया कि भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का व्यापक विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है। इसी क्रम में सांख्यिकी ट्रैक में भारत ने गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों को परिवर्तन का प्रेरक मानते हुए डेटा गुणवत्ता, नवाचार, प्रभावी प्रसार और जन-केंद्रित सांख्यिकी प्रणालियों पर जोर दिया है।
बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसमें सांख्यिकी उत्पादों को मजबूत करने, राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों में सुधार, आंकड़ों के प्रसार और उपलब्धता बढ़ाने तथा मैक्रो-आर्थिक व क्षेत्रीय सांख्यिकी को सुदृढ़ करने पर चर्चा होगी।
ब्रिक्स देशों ने 2010 से संयुक्त सांख्यिकी प्रकाशन (जेएसपी) जारी करना शुरू किया था और 2020 से स्नैपशॉट जेएसपी भी प्रकाशित किया जा रहा है। इस सहयोग ने आंकड़ों के संग्रह से आगे बढ़कर मानकों के सामंजस्य और नवाचार तक का रूप ले लिया है। इसी वर्ष 16-17 अप्रैल को तकनीकी बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें जेएसपी और स्नैपशॉट 2026 के लिए रूपरेखा तय की गई थी।
लखनऊ बैठक के साथ दो अर्ध-दिवसीय साइड इवेंट भी होंगे। 3 अगस्त को ‘प्रशासनिक आंकड़ों की क्षमता का उपयोग’ और 4 अगस्त को ‘बदलते डेटा पारिस्थितिकी तंत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तैयारी’ विषय पर चर्चा होगी। इन आयोजनों में ब्रिक्स देशों के सांख्यिकी कार्यालयों के साथ नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, थिंक टैंक, नागरिक समाज संगठनों और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी होगी।
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