नई दिल्ली : मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग को लेकर उठे विवाद के बीच बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान ने इस मांग से खुद को अलग कर लिया है। पठान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की सिफारिश वाला कोई पत्र नहीं लिखा है। उन्होंने कहा कि यदि उनके नाम से ऐसा कोई पत्र सामने आया है तो उसकी प्रति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
दरअसल, नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योति प्रकाश चटर्जी ने 30 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग की थी। पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और चुनावी प्रक्रिया के संचालन का हवाला देते हुए यह मांग रखी थी।
इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए यूसुफ पठान ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि बंगाल, मुर्शिदाबाद, बहरामपुर और देशभर में लोग अपने वोट के अधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे समय में वह किसी पुरस्कार की सिफारिश क्यों करेंगे। पठान ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है। अगर कोई पत्र है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिेए। पठान ने अपने बयान में खासतौर पर मतदाताओं के मतदान के अधिकार का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में लोगों की आवाज और उनके वोट के अधिकार से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हैं।
उल्लेखनीय है कि यूसुफ पठान तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई पार्टी में आ गए हैं। ऐसे में पार्टी और उनकी राय में अंतर साफ देखा जा सकता है।
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