स्टॉक मार्केट से एफपीआई ने इस महीने अभी तक 22,530 करोड़ रुपये निकाले

नई दिल्ली : जनवरी के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लगातार बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने हुए हैं। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार खरीदारी करके विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में बने दबाव के माहौल को हल्का करने की कोशिश में लगे हुए हैं। जनवरी के महीने में एफपीआई अभी तक भारतीय शेयर बाजार से 22,530 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। इसके पहले साल 2025 के दौरान भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने पूरे साल के दौरान शेयर बाजार में बिकवाली के जरिए 1,66,283 करोड़ रुपये की निकासी की थी।

 

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की और से लगातार की जा रही बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगातार खरीदारी करने की रणनीति बनाई है। जनवरी के महीने में जहां विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक 22,530 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं, वहीं इस महीने 16 जनवरी तक घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 34,076 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की है। साल 2025 के दौरान भी डीआईआई विदेशी निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली का जवाब देने के लिए लगभग पूरे साल लिवाल (बायर) की भूमिका में बने रहे थे। पिछले साल डीआईआई ने कुल 7.44 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की थी, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हुई तमाम उठा पटक के बावजूद भारतीय शेयर बाजार की स्थिति पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ा था।

 

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होने और डॉलर की मजबूती की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार बिकवाली का रुख बनाए हुए हैं। इसके साथ ही वैश्विक व्यापार में बने तनाव, अमेरिकी टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता, बाजार के हाई वैल्यूएशन और करेंसी की अस्थिरता की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बनाया हुआ है। साल 2025 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा स्टॉक मार्केट में की गई जम कर बिकवाली भी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में कमी की एक बड़ी वजह रही। साल 2025 से लेकर अभी तक डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत लगभग पांच प्रतिशत कम हो चुकी है।

 

खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना का कहना है कि अमेरिका और भारत के बीच होने वाले प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर बनी उलझन ने मार्केट सेंटीमेंट्स को कमजोर किया है, जिसकी वजह से निवेशकों के मन में, विशेष रूप से विदेशी निवेशकों के मन की उलझन बढ़ी है। इसके साथ ही मौजूदा अर्निंग सीजन के दौरान बाजार के मिले-जुले संकेतों की वजह से भी विदेशी निवेशक मुनाफा वसूली करते हुए अपना पैसा निकालने में लगे हुए हैं। ऐसी स्थिति में जब तक घरेलू बाजार को कोई पॉजिटिव ट्रिगर नहीं मिलेगा, तब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली का ट्रेंड जारी रह सकता है।

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