जबलपुर : प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष्पीठ के जगद्गुुुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद में द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का खुला समर्थन किया है।
स्वामी सदानंद सरस्वती के अनुसार, शंकराचार्य की नियुक्ति शास्त्रोक्त उत्तराधिकार परंपरा से होती है। उन्होंने तर्क दिया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उनके गुरु भाई हैं और शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य द्वारा उनका अभिषेक किया गया है, जो उनकी वैधता को पुख्ता करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन असली शंकराचार्यों के महत्व को कम करने के लिए नकली संतों को बढ़ावा दे रहा है, जो सनातन परंपरा के लिए घातक है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ब्राह्मणों पर अत्याचार करने वाला कभी सुखी नहीं रहता और इस पूरे प्रकरण में राजनीति का प्रवेश होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के अन्य तीनों शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ खड़े हैं। उन्होंने प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी सरकारी तंत्र को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी शंकराचार्य से उनकी प्रामाणिकता का प्रमाण मांगे।
स्वामी सदानंद सरस्वती ने ब्राह्मण छात्रों बटुकों के साथ की गई कथित बर्बरता पर प्रशासन की इस कार्रवाई को निंदनीय करार देते हुए कहा कि निहत्थे बच्चों को बुरी तरह पीटना किसी भी सभ्य समाज और धार्मिक शासन के लिए शर्मनाक है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि प्रशासन अपनी गलती मानकर क्षमा मांग ले, तो यह गतिरोध तुरंत समाप्त हो सकता है।
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