नई दिल्ली : भारत और भूटान ने अपने द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई दिल्ली में मंगलवार को भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो जेम शेरिंग ने केंद्रीय विद्युत एवं आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल तथा विद्युत, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक से मुलाकात की।
विद्युत मंत्रालय के अनुसार इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य केंद्र दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जलविद्युत सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। आज की चर्चा के दौरान, दोनों पक्षों ने पुनात्सांगचू-II जलविद्युत परियोजना (1020 मेगावाट) से बिजली उत्पादन के व्यावसायिक अनुकूलन पर विचार-विमर्श किया। पुनात्सांगचू-I जलविद्युत परियोजना (1200 मेगावाट) के शीघ्र चालू होने पर भी जोर दिया गया। संकोश जलविद्युत परियोजना के भविष्य के दृष्टिकोण पर भी विचार-विमर्श हुआ।
इसके अलावा, भारत और भूटान 2040 तक एक मजबूत पावर ग्रिड नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम कर रहे हैं। चर्चा का एक अहम पहलू भूटान में सर्दियों के दौरान होने वाली बिजली की किल्लत रहा, जिसके समाधान के लिए सप्लाई अनुमोदन की प्रक्रिया को तेज करने पर सहमति बनी। मंत्रियों ने इस सहयोग को दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक बताया।
उल्लेखनीय है कि भारत-भूटान जलविद्युत सहयोग की शुरुआत 1961 में हुई, जिसके बाद 2006 में जलविद्युत सहयोग पर एक समझौता हुआ।
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