नई दिल्ली : केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आईआईटी मद्रास का कंसोर्टियम आधारित नवाचार मॉडल तकनीक के त्वरित और उपयुक्त व्यावसायीकरण को संभव बना रहा है। अन्य शैक्षणिक संस्थान और विश्वविद्यालय भी इस मॉडल को अपना रहे हैं।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने रविवार को आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क स्थित इमर्सिव टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप लैब्स (आईटीईएल) फाउंडेशन और अन्य उन्नत शोध केंद्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने शहरी परिवहन, अंतरिक्ष तकनीक, चिकित्सा उपकरण और मस्तिष्क अनुसंधान से जुड़े प्रोजेक्ट की समीक्षा भी की।
उन्होंने कहा कि कंसोर्टियम मॉडल में उद्योग की भागीदारी विकास के शुरुआती चरण से होती है। इससे शोध सीधे व्यावहारिक जरूरतों से जुड़ता है और तकनीक तेजी से बाजार तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि अकादमिक संस्थानों, उद्योग और सरकार के समन्वय से नवाचार को गति मिलती है।
इस दौरान एआई आधारित शहरी परिवहन प्रणाली का प्रदर्शन किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य 15 किलोमीटर की दूरी को लगभग 20 मिनट में तय करना है। यह ऊंचे ट्रैक पर छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए संचालित होगी। इसका मकसद ट्रैफिक जाम कम करना है।
डॉ. सिंह ने निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस के कार्यों की भी समीक्षा की। कंपनी छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए रॉकेट बना रही है। कंपनी इस वर्ष अपने पुन: उपयोग योग्य रॉकेट के वाणिज्यिक मिशन की तैयारी कर रही है।
उन्होंने आईआईटी मद्रास इनक्यूबेशन सेल का भी दौरा किया। यहां अब तक 500 से अधिक स्टार्टअप विकसित किए गए हैं। ये स्टार्टअप जलवायु, स्वास्थ्य, एआई और डीप टेक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर में स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों की जानकारी दी गई। यहां विकसित 12 उत्पाद भारत और विदेश में 2 करोड़ से अधिक मरीजों तक पहुंच चुके हैं। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का भी दौरा किया। यहां मानव मस्तिष्क की उच्च गुणवत्ता वाली 3डी इमेज तैयार की जा रही है। यह भारत में इस तरह का पहला प्रयास है।
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