ब्लाइंड क्रिकेट को बीसीसीआई का बड़ा संबल, समावेशी विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम

नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष मिथुन मन्हास और सचिव देवजीत सैकिया ने इसे भारतीय क्रिकेट में समावेशी विकास की दिशा में निर्णायक कदम बताया है। यह समर्थन पुरुष और महिला दोनों राष्ट्रीय टीमों को मिलेगा, जो क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (कैबीआई) के अंतर्गत संचालित होती हैं।

 

बीसीसीआई ने शनिवार को एक संरचित व्यवस्था का ऐलान किया, जिसके तहत दोनों टीमों को नियमित और औपचारिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। पिछले एक दशक में भारत के दृष्टिबाधित क्रिकेटरों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पुरुष टीम ने कई विश्व कप खिताब जीते हैं, जबकि महिला टीम ने पिछले वर्ष श्रीलंका में आयोजित पहले विश्व कप में ऐतिहासिक सफलता दर्ज की थी।

 

मिथुन मनहास ने कहा कि दृष्टिबाधित क्रिकेटरों की उपलब्धियां पूरे क्रिकेट समुदाय के लिए गर्व का विषय हैं और उन्हें निरंतर व औपचारिक समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीसीसीआई का लक्ष्य खिलाड़ियों को बेहतर अवसर, बुनियादी ढांचा और अंतरराष्ट्रीय अनुभव उपलब्ध कराना है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

 

नई व्यवस्था के तहत बीसीसीआई प्रत्येक वर्ष दोनों टीमों के लिए दो अंतरराष्ट्रीय विदेशी दौरों के यात्रा व्यय का वहन करेगा। साथ ही भारत में आयोजित द्विपक्षीय श्रृंखलाओं के दौरान घरेलू और मेहमान टीमों के लिए आवास की व्यवस्था भी की जाएगी। बोर्ड अपने संबद्ध स्टेडियमों और मैदानों को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए उपलब्ध कराएगा।

 

बीसीसीआई ने कहा कि यह पहल समावेशी क्रिकेट की उस व्यापक सोच के अनुरूप है, जिसे आईसीसी के वर्तमान अध्यक्ष जय शाह ने अपने कार्यकाल के दौरान आगे बढ़ाया था। सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि यह सहयोग दृष्टिबाधित खिलाड़ियों को बेहतर पेशेवर माहौल और सुविधाएं उपलब्ध कराएगा, जिससे भारत में ब्लाइंड क्रिकेट के मानकों को नई ऊंचाई मिलेगी।

 

बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वह देशभर में क्रिकेट की पहुंच बढ़ाने और हर वर्ग के खिलाड़ियों को अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

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