ईरानी विदेश मंत्री से बातचीत में जयशंकर ने ऊर्जा सुरक्षा का भी उठाया मुद्दा

नई दिल्ली : विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के हालात के बीच ईरान के विदेश मंत्री से अब तक तीन बार बातचीत की। इसमें भारतीय जहाजों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा हुई।

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में एक सवाल पर कहा, “पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच तीन बार बातचीत हुई है। अंतिम बातचीत में शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके अलावा अभी मेरे लिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।”

 

उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से सबसे ज्यादा तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते देश में गैस की उपलब्धता में कमी आई है।

 

वहीं बांग्लादेश को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर प्रवक्ता ने कहा कि भारत विशेष रूप से हमारे पड़ोसियों के लिए परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक है। हमें बांग्लादेश सरकार से डीजल की आपूर्ति के लिए एक अनुरोध प्राप्त हुआ है, जिस पर विचार किया जा रहा है। बांग्लादेश के साथ संबंधों के प्रति हमारे जनकेंद्रित और विकास-उन्मुख दृष्टिकोण को देखते हुए हम 2007 से नुमालीगढ़ रिफाइनरी से विभिन्न माध्यमों: जलमार्ग, रेल और बाद में भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइप-लाइन के माध्यम से डीजल की आपूर्ति कर रहे हैं।

 

उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के बीच पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों पर हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति के लिए एक बिक्री-खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। हालांकि 2007 से बांग्लादेश को डीजल का निर्यात काफी हद तक जारी रहा है, लेकिन निर्णय लेते समय भारत की रिफाइनरी क्षमता, अपनी आवश्यकता और डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाएगा।

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