इस्लामपुर, कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी गलियारों में बड़ा भूचाल आ गया है। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM (एआईएमआईएम) ने हुमायूं कबीर की ‘आम जनता विकास पार्टी’ (AJUP) के साथ अपना गठबंधन तत्काल प्रभाव से खत्म करने का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को होने वाली दोनों नेताओं की संयुक्त रैली से चंद घंटे पहले आए इस फैसले ने कबीर के राजनीतिक भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब ओवैसी की पार्टी बंगाल के रण में अकेले ही चुनावी मैदान में उतरेगी।
वायरल स्टिंग वीडियो ने बिगाड़ा खेल, मुस्लिम समाज के अपमान का आरोप
गठबंधन टूटने की मुख्य वजह हुमायूं कबीर का एक कथित स्टिंग वीडियो बताया जा रहा है, जिसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जारी किया है। इस 19 मिनट के वीडियो में कबीर को कथित तौर पर यह कहते सुना गया कि “मुसलमानों को बेवकूफ बनाना आसान है।” साथ ही, वीडियो में वे भाजपा नेताओं के साथ कथित तौर पर करोड़ों रुपये की डील और चुनाव के बाद समर्थन देने की बात करते नजर आ रहे हैं। एआईएमआईएम ने सोशल मीडिया पर कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि वह ऐसे किसी भी व्यक्ति या बयान के साथ खड़ी नहीं हो सकती, जो मुस्लिम समाज की ईमानदारी और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता हो।
रैली से पहले मची खलबली, ‘प्लान बी’ हुआ फेल?
इस्लामपुर में शुक्रवार को हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी की एक विशाल संयुक्त रैली प्रस्तावित थी, जिसे गठबंधन की ताकत के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन रैली से ठीक पहले गठबंधन टूटने की खबर ने कार्यकर्ताओं में मायूसी और राजनीतिक खेमों में हलचल पैदा कर दी है। कबीर ने हालांकि इस वीडियो को ‘AI जनरेटेड’ और फर्जी करार दिया है, लेकिन ओवैसी की पार्टी ने किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए उनसे पल्ला झाड़ना ही बेहतर समझा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम टीएमसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
एआईएमआईएम का नया ऐलान: अब अकेले लड़ेगी चुनाव
गठबंधन खत्म करने के साथ ही एआईएमआईएम ने साफ कर दिया है कि वह अब किसी भी दल के साथ समझौता नहीं करेगी। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि बंगाल के मुस्लिम समाज को एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज की जरूरत है, जो बिना किसी स्वार्थ के उनके अधिकारों की बात कर सके। उधर, हुमायूं कबीर के लिए यह दोहरा झटका है, क्योंकि चुनाव से ऐन पहले एक मजबूत साथी का साथ छूट गया है और उन पर भाजपा की ‘बी-टीम’ होने के आरोप भी गहरा गए हैं। बंगाल की राजनीति में इस नए घटनाक्रम ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह उलझा दिया है।
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