आरक्षण को महिलाओं का हक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, इसे लटकाए रखने के पाप से मुक्ति पाने का अवसर

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में सभी दलों से सरकार की ओर से लाए गए तीन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित कराने का अनुरोध किया ताकि इससे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त हो सके। उन्होंने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण को रोका जाता रहा है। अब इसका प्रायश्चित करने का समय है। वे मानते हैं कि देश की प्रगति में महिलाओं का योगदान है और इस ऋण को हमें स्वीकार करना चाहिए।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में परिसीमन और उसके बाद महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े तीन विधायकों पर एक साथ जारी चर्चा में भाग लिया। चर्चा कल तक चलेगी और अंत में गृह मंत्री इसका जवाब देंगे। विधेयकों में एक संविधान संशोधन विधेयक है, जिसे पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है।

 

चर्चा में भाग लेते हुए एक तरफ प्रधानमंत्री ने विधेयकों को राजनीतिक बताने के विपक्ष के आरोपों का खंडन किया तो दूसरी ओर स्पष्टीकरण भी दिया कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव या अन्याय नहीं होगा। साथ ही लोकसभा की सीटों में इजाफा समय की मांग है। इसी को ध्यान में रखते हुए नए संसद भवन का निर्माण किया गया है।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से विधायिका का सामर्थ्य बढ़ेगा। इसे राजनीति के तराजू से नहीं तोलना चाहिए। ये राष्ट्रहित का निर्णय है। उन्होंने कहा, “हम उस अहंकार में न रहें कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं… जी नहीं! उसका हक है। हमने कई दशकों से रोका हुआ है। आज उसका प्रायश्चित कर उस पाप से मुक्ति पाने का अवसर है।”

 

मोदी ने आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार की नीयत साफ है और हमें शब्दों से खेलने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं आज बड़ी जिम्मेदारी के साथ इस सदन से कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हों या बड़े राज्य हो… ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी। भूतकाल में जो सरकार रही, जिनके काल में जो परिसीमन हुआ, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं… क्योंकि अगर नीयत साफ है, तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।”

 

विपक्ष के सरकार पर महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति करने के आरोपों का प्रधानमंत्री ने खंडन किया। उन्होंने कहा कि सरकार का इसके पीछे उद्देश्य राजनीतिक नहीं है। हम महिलाओं को उनका अधिकार दे रहे हैं। 2023 में इसी सदन ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को स्वीकार किया था। अब हमें तकनीकी बहाने बनाकर इसे रोकना नहीं चाहिए।

 

उन्होंने कहा, “2023 में जब हम इस पर चर्चा कर रहे थे, तब लोग कह रहे थे, जल्दी करो। 2024 में संभव नहीं हो पाया क्योंकि इतने कम समय में नहीं हो पाता। अब 2029 में हमारे पास समय है, अगर 2029 में भी नहीं करेंगे तो स्थिति क्या बनेगी हम कल्पना कर सकते हैं। समय की मांग है कि अब हम ज्यादा विलंब न करें।”

 

उन्होंने कहा, “राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय की समाज की मनःस्थिति एवं नेतृत्व की क्षमता उस पल को कैप्चर कर एक राष्ट्र की अमानत बना देती हैं, एक मजबूत धरोहर तैयार करती हैं। भारत के संसदीय इतिहास में ये वैसा ही पल है।”

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को हमेशा इसका नुकसान उठाना पड़ा है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ। इसके पीछे कारण यह था कि सबने सर्वसम्मति से महिला आरक्षण का विधेयक पारित किया था।

 

उन्होंने कहा, “अगर हम सब साथ आ जाते हैं, तो इतिहास गवाह है कि ये किसी एक के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा। ये देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा, देश की सामूहिक निर्णय शक्ति के पक्ष में जाएगा और हम सब उस यश के हकदार होंगे। न ट्रेजरी बेंच उसका हकदार होगा और न ही मोदी उसका हकदार होगा। इसलिए जिस किसी को भी इससे राजनीतिक बू आ रही है, वो पिछले 30 साल के खुद के परिणामों को देख ले। इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।”

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की प्रगति में महिलाओं का योगदान है और इस ऋण को हमें स्वीकार करना चाहिए। देश में करीब 650 से अधिक जिला पंचायतें हैं। करीब पौने तीन सौ महिलाएं उसका नेतृत्व करती हैं। उनपर एक कैबिनेट मिनिस्टर से ज्यादा जिम्मेदारी होती है। करीब 6,700 ब्लॉक पंचायतों में से करीब 2700 से अधिक ब्लॉक पंचायतों का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में हैं। आज देश में 900 से अधिक शहरों में अर्बन लोकल बॉडीज की हेड के रूप में बहनें कार्यरत हैं।

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