राहुल गांधी मानहानि मामले में न्यायालय ने वादी पक्ष को दी कड़ी चेतावनी, अगली सुनवाई 22 अप्रैल को

सुलतानपुर : उत्तर प्रदेश के जिला सुलतानपुर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले में शुक्रवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने वादी पक्ष के रवैये पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें भविष्य में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने की चेतावनी दी है।

 

काशी शुक्ला ने शुक्रवार को बताया कि वादी पक्ष पिछले कई तारीखों से लगातार स्थगन की मांग कर रहा है, जिससे मामले की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली नियत तिथि पर वादी पक्ष बहस के लिए उपस्थित नहीं होता है, तो उनके विरुद्ध उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तारीख तय की गई है।

 

राहुल के अधिवक्ता काशी शुक्ला ने बताया कि अदालत में धारा 311 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत एक प्रार्थना पत्र पर बहस होनी थी। इससे पहले, 28 मार्च को हुई सुनवाई में वादी के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने राहुल गांधी की आवाज के नमूने की जांच की मांग की थी। उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 311 सहपठित धारा 91 के तहत एक आवेदन दिया था।

 

इस आवेदन में राहुल गांधी की आवाज का सैंपल लेकर उसे पहले से दाखिल की गई सीडी के साथ विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फोरेंसिक लैब) में मिलान कराने का अनुरोध किया गया है। राहुल गांधी के वकीलों ने इस मांग पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। यह मानहानि का मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अक्टूबर 2018 में दर्ज कराया था। इस मामले में राहुल गांधी ने 20 फरवरी 2024 को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें 25-25 हजार रुपए के दो मुचलकों पर जमानत दी थी।

 

राहुल गांधी ने 26 जुलाई 2024 को एमपी/एमएलए कोर्ट में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया था। राहुल गांधी के बयान के बाद, कोर्ट ने वादी पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद से लगातार गवाह पेश किए जा रहे थे। इससे पहले 20 फरवरी को भी राहुल गांधी ने एमपी/एमएलए कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था। कोर्ट ने उन्हें अपनी बेगुनाही के संबंध में सफाई और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा था। हालांकि, राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने कोर्ट में कोई सफाई या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

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