बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण पर आईबीसीए सम्मेलन, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली : वन्यजीव संरक्षण की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए भारत एक जून से इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस समिट (आईबीसीए) की मेजबानी करेगा। भारत मंडपम में आयोजियत होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले बुधवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस सम्मलेन की आधिकारिक वेबसाइट और लोगो का अनावरण किया। इस मौके पर एक प्रचार फिल्म भी जारी की गई।

 

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह सम्मेलन वैश्विक संरक्षण कूटनीति में एक “मील का पत्थर” साबित होगा। इसमें सदस्य और पर्यवेक्षक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों की भागीदारी की उम्मीद है। सम्मेलन का थीम “बिग कैट को बचाओ, मानवता को बचाओ, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाओ।” रखा गया है, जो पर्यावरण और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।

 

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में 400 से अधिक संरक्षण विशेषज्ञ, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थान, कॉर्पोरेट जगत के नेता और समुदाय प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके साथ ही 95 देशों के अधिकारी तकनीकी सत्रों में भाग लेंगे, जहां संरक्षण रणनीतियों और चुनौतियों पर गहन चर्चा होगी।

 

मंत्री ने भारत की संरक्षण यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रोजेक्ट टाइगर जैसी सफल पहलों का जिक्र किया और कहा कि भारत ने यह सिद्ध किया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का अनुभव और वैश्विक जिम्मेदारी की भावना ही आईबीसी ए के गठन का आधार बनी।

 

भूपेंद्र यादव ने अपने वक्तव्य में कहा कि दो दिन चलने वाले सम्मेलन के निष्कर्ष “दिल्ली घोषणापत्र ” जारी किया जाएगा , जो चीते, बाघ जैसी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए पहली वैश्विक घोषणा होगी। इसमें साझा प्राथमिकताओं को तय किया जाएगा, देशों के बीच सहयोग को मजबूत किया जाएगा और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर जोर दिया जाएगा।

 

केंद्रीय मंत्री ने सभी देशों से इस पहल में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि जो देश अभी आईबीसीए का हिस्सा नहीं हैं, वे भी इसमें शामिल होकर इन प्रजातियों के सुरक्षित भविष्य के लिए योगदान दें। उन्होंने कहा कि यहसम्मेलन न केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण में भारत की नेतृत्व भूमिका को और मजबूत करेगा।

 

सम्मेलन के दौरान एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें जनजातीय कला, पेंटिंग्स, फोटोग्राफी, फिल्में और वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से बिग कैट और जैव विविधता संरक्षण को प्रदर्शित किया जाएगा।

 

कार्यक्रम में विभिन्न “ बिग कैट रेंज देश ” के राजनयिकों, पर्यावरण मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और आई बीसीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

 

उल्लेखनीय है कि आई बीसीए, जिसका मुख्यालय भारत में है, एक अंतर-सरकारी संगठन है जो सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों—शेर, बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जैगुआर और प्यूमा—के संरक्षण के लिए कार्य करता है। इसकी स्थापना वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर की गई थी। भारत में सात बड़ी बिल्लियों के प्रजातियों में से पांच पाईं जाती है।

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