कूटनीति लाई रंग! ईरान की जेल से रिहा हुए 10 भारतीय नाविक, महीनों बाद मिली आजादी

Iran : ईरान में जुलाई 2025 से हिरासत में रखे गए 10 भारतीय नाविकों को आखिरकार रिहा कर दिया गया है। भारत का नौवहन महानिदेशालय ने मंगलवार देर रात इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सभी नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें जल्द भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 

ये सभी नाविक एमवी हार्बर फीनिक्स नामक ऑयल टैंकर पर सवार थे, जिसे ईरान ने जास्क पोर्ट के पास रोक लिया था। इसके बाद चालक दल को हिरासत में ले लिया गया था।

 

लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद मिली राहत

महानिदेशालय के मुताबिक भारत सरकार और ईरानी अधिकारियों के बीच लगातार कूटनीतिक बातचीत के बाद नाविकों की रिहाई संभव हो सकी। हालांकि सरकार की ओर से उनकी गिरफ्तारी के कारणों या जहाज से जुड़े पूरे मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

 

अधिकारियों का कहना है कि सभी नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।

 

भारत ने अपनाई ‘शांत कूटनीति’

रिपोर्टों के अनुसार इस पूरे मामले में भारत ने बेहद संतुलित और शांत कूटनीतिक रणनीति अपनाई। भारत के ईरान, अमेरिका और इजरायल तीनों के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं, इसलिए सरकार ने सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।

 

जहाज ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार एमवी हार्बर फीनिक्स पलाऊ के झंडे वाला तेल उत्पाद टैंकर है। ईरानी बल खाड़ी क्षेत्र में ऐसे जहाजों को अक्सर रोकते रहे हैं, जिन पर अवैध रूप से ईंधन ले जाने का संदेह होता है।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर निगरानी और प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं।

 

बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में सुरक्षा हालात और संवेदनशील हो गए हैं।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से मंगाता है।

 

ऐसे में भारतीय नाविकों की रिहाई को न केवल मानवीय बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बड़ी राहत माना जा रहा है।

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