मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 329 का हवाला देकर दिया ‘संवैधानिक’ झटका, जानिए क्या कहता है ये आर्टिकल…

MP : मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामांकन की खारिजगी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए इस तरह की याचिका की सुनवाई नहीं की जा सकती।

 

क्या है अनुच्छेद 329?

अनुच्छेद 329 भारतीय संविधान का एक प्रावधान है जो चुनाव से संबंधित मामलों में विशेष संरक्षण प्रदान करता है। इसमें कहा गया है कि चुनाव से जुड़े विवादों के मामलों में, यदि कोई कार्यवाही या निर्णय चुनाव आयोग या संबंधित प्राधिकारी द्वारा किया गया हो, तो ऐसी किसी भी कार्यवाही के खिलाफ अदालत में अपील या याचिका दायर करने का समय सीमा निश्चित कर दी जाती है। यह अनुच्छेद चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी या अड़चन से बचाने के लिए है, ताकि चुनाव प्रक्रिया अपनी गति से पूरी हो सके।

 

क्या हुआ था?

रिटर्निंग ऑफिसर ने 9 जून को नटराजन का नामांकन इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उन्होंने फार्म 26 के हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में उनके खिलाफ लंबित निजी शिकायत के केस का विवरण नहीं दिया है। नटराजन ने इस शिकायत का उल्लेख नहीं किया था। इसके बाद, नटराजन ने चुनाव आयोग को इस संबंध में ज्ञापन दिया, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

 

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और एएस चंदुरकर की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान, याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 33ए के तहत, दो साल से अधिक सजा वाले अपराध या जिन मामलों में आरोप तय हो चुके हों, उनका विवरण हलफनामे में देना जरूरी है। लेकिन यहां तो आरोप तय नहीं हुए हैं, बल्कि सिर्फ एक निजी शिकायत का नोटिस जारी किया गया है। इसलिए, नामांकन रद्द करने का निर्णय गलत है।

 

विपक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव लड़ना एक विधायी अधिकार है, यह मौलिक अधिकार नहीं है। ऐसे में, अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी याचिका की सुनवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 329 स्पष्ट रूप से कहता है कि ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं की जाएगी।

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि कोर्ट इस तरह की व्याख्या मान ले कि नामांकन खारिज होने में गलती होने पर भी कोर्ट अनुच्छेद 32 और 226 के तहत याचिका सुन सकता है, तो इसका अर्थ होगा कि ऐसी याचिकाओं का भी समाधान हो सकता है, जो अनुच्छेद 329 के दायरे में नहीं आतीं। इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और यह संविधान की मंशा के खिलाफ जा सकता है।

 

कोर्ट ने कहा कि याचिका विचार करने योग्य नहीं है, और इसे खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने नटराजन को चुनाव याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है, पर इस फैसले में मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

क्या था मामला?

रिटर्निंग ऑफिसर ने 9 जून को कहा कि नटराजन ने फार्म 26 के हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में उनके खिलाफ लंबित निजी शिकायत के केस का विवरण नहीं दिया है। इस कारण से उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था। नटराजन ने पहले चुनाव आयोग को इस संबंध में ज्ञापन दिया था, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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