प्रोजेक्ट-18: भारतीय नौसेना रचेगी इतिहास; समुद्र में महाशक्ति बनने के लिए बनेंगे 12 सबसे बड़े ‘नेक्स्ट जेनरेशन’ युद्धपोत

नई दिल्ली: भारत आने वाले वर्षों में अपनी समुद्री ताकत को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है। भारतीय नौसेना ‘प्रोजेक्ट-18 नेक्स्ट जेनरेशन डिस्ट्रॉयर (NGD)’ के तहत 10 से 12 अत्याधुनिक स्टील्थ डिस्ट्रॉयर बनाने की योजना पर काम कर रही है। आजादी के बाद इसे देश का सबसे महत्वाकांक्षी नौसैनिक युद्धपोत कार्यक्रम माना जा रहा है। नौसेना मुख्यालय और वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) मिलकर इस परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं।

 

75 फीसदी उपकरण होंगे स्वदेशी

प्रोजेक्ट-18 के तहत बनने वाले युद्धपोतों का निर्माण देश के प्रमुख शिपयार्ड मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में किया जाएगा। इन जहाजों में करीब 75 फीसदी स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल होगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत यह परियोजना रक्षा उत्पादन और सैन्य क्षमता, दोनों के लिहाज से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

 

पुरानी रणनीति से अलग होगा प्रोजेक्ट-18

अब तक भारतीय नौसेना आमतौर पर 3 या 4 युद्धपोतों के छोटे बैच का ऑर्डर देती रही है, जैसा कि प्रोजेक्ट-15A कोलकाता क्लास और प्रोजेक्ट-15B विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर में देखा गया। लेकिन प्रोजेक्ट-18 इस रणनीति से अलग है। नौसेना की योजना इन युद्धपोतों को वर्ष 2050 तक भारत की ब्लू-वॉटर फ्लीट की रीढ़ बनाने की है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक बढ़त और मजबूत होगी।

 

युद्ध क्षमता में होगी बड़ी छलांग

प्रस्तावित डिस्ट्रॉयर केवल पुराने जहाजों का अपग्रेड नहीं होंगे, बल्कि आकार, मारक क्षमता और आधुनिक तकनीक के मामले में पूरी तरह नई पीढ़ी के युद्धपोत होंगे। इनका विशाल आकार और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को कई गुना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

 

जानिए नए डिस्ट्रॉयर की प्रमुख खूबियां

अंतरराष्ट्रीय क्रूजर श्रेणी में आएंगे नौसेना के नए जहाज।

अब तक बने सबसे बड़े सरफेस कॉम्बैटेंट होंगी नई शिप।

पहले के जहाजों की तुलना में ज्यादा एडवांस्ड सिस्टम लगेंगे।

हर जहाज का वजन 11,000 से 13,000 टन के बीच होगा।

जमीन, समुद्र और हवा में लक्ष्यों को भेदने की बेजोड़ क्षमता मिलेगी।

हर डिस्ट्रॉयर में 144 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल हो सकते हैं।

डिस्ट्रॉयर जहाजों की तुलना में गोला-बारूद ले जाने की क्षमता बढ़ेगी।

लॉन्च ट्यूबों में एयर डिफेंस के लिए लंबी दूरी की सरफेस-टू-एयर मिसाइलें होंगी।

सुपरसोनिक ब्रह्मोस एक्सटेंडेड रेंज मिसाइलें और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलें भी होंगी।

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