अमरोहा में बड़ा खेल! कब्रिस्तान की 5 एकड़ जमीन पर बसा दी पूरी कॉलोनी, जांच में 69 मकान मिले अवैध; अब चलेगा प्रशासन का बुलडोजर

अमरोहा (मंडी धनौरा)। उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों और भू-माफियाओं के खिलाफ चल रहे सरकारी अभियान के बीच अमरोहा से एक बड़ी लापरवाही और धोखाधड़ी का मामला उजागर हुआ है। यहाँ के नगर क्षेत्र के मोहल्ला बकाबाद में राजस्व अभिलेखों (सरकारी रिकॉर्ड) में कब्रिस्तान के नाम दर्ज करीब पांच एकड़ भूमि पर पिछले एक दशक के भीतर पूरी कॉलोनी विकसित कर दी गई। एक गोपनीय शिकायत के बाद हुई प्रशासनिक जांच में 69 मकान पूरी तरह अवैध पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है और अब अवैध निर्माणों को ढहाने की कानूनी तैयारी शुरू कर दी गई है।

 

तीन गाटा संख्याओं पर हुआ अवैध निर्माण, ऐसे खुला राज

यह पूरा मामला अमरोहा के मंडी धनौरा क्षेत्र के मुहल्ला बकाबाद का है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, यहाँ की गाटा संख्या 412, 414 और 415 राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज हैं। आरोप है कि कुछ स्थानीय रसूखदारों ने इस सरकारी व मजहबी जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताकर सालों तक भोले-भाले खरीदारों को बेच दिया।

 

पिछले 10 वर्षों से यहाँ धड़ल्ले से प्लॉटिंग और निर्माण का खेल चलता रहा, लेकिन स्थानीय स्तर पर किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। हाल ही में इस पूरे घोटाले की एक गुप्त शिकायत मुरादाबाद के मंडलायुक्त (कमिश्नर) से की गई। कमिश्नर के आदेश पर हरकत में आए तहसील प्रशासन ने नायब तहसीलदार अजीत सिंह के नेतृत्व में राजस्व कर्मियों की एक टीम गठित कर मौके पर पैमाइश कराई, जिसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।

 

गाटा संख्या 412: इस प्लॉट पर सबसे ज्यादा 38 लोगों ने पक्के मकान बना रखे हैं।

गाटा संख्या 415: यहाँ 30 लोगों के अवैध निर्माण पाए गए हैं।

गाटा संख्या 414: इस गाटा संख्या पर फिलहाल कोई नया निर्माण नहीं मिला है।

बिना बैनामे और बिना नक्शे के खड़ी कर दी ‘अवैध कॉलोनी’

प्रशासनिक जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह यह कि इस कॉलोनी में रहने वाले अधिकांश लोगों के पास जमीन की रजिस्ट्री (वैध बैनामा) तक नहीं है। भू-माफियाओं ने इन्हें केवल 100 या 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर ‘लिखित समझौते’ (नॉटरी) के आधार पर जमीन के टुकड़े बेच दिए। इतना ही नहीं, इनमें से किसी भी मकान का नक्शा नगर पालिका से पास नहीं कराया गया है। प्रशासन अब इस अवैध खरीद-फरोख्त के सिंडिकेट से जुड़े मास्टरमाइंड्स और तत्कालीन लापरवाह कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रहा है।

कब्जाधारकों पर ‘पीपी-4 एक्ट’ के तहत दर्ज होंगे मुकदमे, कोर्ट से जारी होंगे नोटिस

मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने अवैध कब्जाधारकों और जमीन बेचने वालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। तहसील प्रशासन इन सभी अवैध निर्माणकर्ताओं के विरुद्ध एसडीएम न्यायालय में पीपी-4 एक्ट (Public Premises Eviction Act) के तहत मुकदमा दर्ज करने जा रहा है।

 

“राजस्व जांच के दौरान कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई है। संबंधित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में कब्रिस्तान दर्ज है। ऐसे सभी अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ एसडीएम न्यायालय में पीपी-4 एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। सभी को कोर्ट से नोटिस जारी कर उनका पक्ष और जवाब मांगा जाएगा। नियमसंगत सुनवाई के बाद विधिक कार्रवाई (ध्वस्तीकरण) अमल में लाई जाएगी। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होंगे।”

 

— शैलेश कुमार दुबे, एसडीएम (मंडी धनौरा)

 

दूसरा पक्ष: विक्रेता का दावा, ‘जमीन हमारी है’

वहीं दूसरी ओर, इस जमीन को बेचने वाले मुख्य आरोपी अब्दुल अजीज ने प्रशासन के दावों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है। अब्दुल अजीज का कहना है, “यह भूमि हमारी पैतृक संपत्ति है। पूर्व में (पास्ट में) किसी अधिकारी या विभाग ने गलत तरीके से इसे सरकारी रिकॉर्ड में कब्रिस्तान दर्ज कर दिया था। हम इस मामले को सिविल कोर्ट से जीत चुके हैं।”

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