लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राजधानी लखनऊ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दो दिवसीय संगठनात्मक दौरे के दूसरे दिन आज एनडीए की एकजुटता और चुनावी रणनीति की मजबूत नींव रखी गई।
वहीं, बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन तलाश रहे लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने भी लखनऊ में बड़ा शक्ति प्रदर्शन कर यूपी चुनाव के लिए अपनी दावेदारी ठोक दी है।
पूर्व अध्यक्षों से फीडबैक और सहयोगियों से मुलाकात
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ प्रवास का आज दूसरा दिन था। सुबह की शुरुआत संगठनात्मक जमीनी फीडबैक के साथ हुई, जिसके बाद एनडीए के घटक दलों के साथ हाई-प्रोफाइल बैठक संपन्न हुई।
पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ ‘चाय पर चर्चा’
सुबह-सुबह राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यूपी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ एक अहम बैठक की। इसमें डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और स्वतंत्र देव सिंह जैसी वरिष्ठ हस्तियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक से साफ है कि भाजपा अपने पुराने और अनुभवी नेतृत्व को दरकिनार नहीं कर रही है। पुराने कप्तानों के अनुभवों और फीडबैक का इस्तेमाल आगामी चुनाव के टिकट बंटवारे और रणनीति में किया जाएगा।
इसके ठीक बाद लखनऊ के एक प्रतिष्ठित होटल में एनडीए के सहयोगी दलों के बड़े नेताओं के साथ एक अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य रूप से रालोद के त्रिलोक त्यागी, निषाद पार्टी के डॉ. संजय निषाद, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर और अपना दल (एस) के आशीष पटेल आदि शामिल थे।
बैठक का संदेश: ‘जिताऊ’ ही लड़ेगा
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सभी सहयोगी दलों के नेताओं की बातों को बेहद गंभीरता और बारीकी से सुना। बैठक से सबसे बड़ा फैसला और संकेत यह निकलकर आया है कि सीटों के बंटवारे में किसी भी तरह की जिद या ‘कोटा सिस्टम’ की जगह, केवल और केवल ‘जिताऊ उम्मीदवार’ को ही पैमाना बनाया जाएगा। सभी दलों से साफ कह दिया गया है कि लक्ष्य सिर्फ यूपी में प्रचंड बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बनाना है।
पासवान जयंती पर चिराग का शक्ति प्रदर्शन
एक तरफ जहां भाजपा अपने एनडीए कुनबे को मजबूत करने में जुटी थी, वहीं लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एनडीए के एक और अहम सहयोगी चिराग पासवान ने अपना दम दिखाया।
माहौल बनाने की कोशिश: दिवंगत नेता रामविलास पासवान की जयंती के मौके पर लखनऊ में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
यूपी में बिछाई सियासी बिसात: राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान की नजर उत्तर प्रदेश के बड़े पासवान (दलित) वोट बैंक पर है। लोकसभा चुनाव में 100% स्ट्राइक रेट (बिहार में 5 में से 5 सीटें) देने के बाद चिराग का हौसला बुलंद है।
सीटों पर दावा ठोकने की तैयारी: लोजपा (रामविलास) के यूपी प्रभारी और सांसद अरुण भारती पहले ही साफ कर चुके हैं कि पार्टी यूपी चुनाव में हाथ आजमाने को पूरी तरह तैयार है। चिराग पासवान अब यूपी में भी एनडीए गठबंधन के तहत सम्मानजनक सीटें चाहते हैं; आज का कार्यक्रम इसी दबाव की राजनीति और माहौल बनाने की शुरुआत माना जा रहा है।
इस सियासी हलचल के क्या हैं मायने?
राजनीतिक गलियारों और सूत्रों के हवाले से इस पूरे घटनाक्रम के कई बड़े मायने निकाले जा रहे हैं:
3. विपक्ष के नैरेटिव की काट: भाजपा और सहयोगी दलों की बैठकों में इस बात पर भी जोर रहा कि विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे ‘संविधान और आरक्षण’ के नैरेटिव को जमीन पर कैसे काटा जाए। चिराग पासवान की एंट्री को इसी दलित कार्ड की काट के रूप में देखा जा रहा है।
1. कट सकते हैं कई टिकट: ‘जिताऊ उम्मीदवार’ वाले फॉर्मूले के तहत भाजपा और सहयोगी दल इस बार कई मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकते हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी (नाराजगी) को दूर किया जा सके।
2. बीजेपी के लिए ‘अतिरिक्त ताकत’?: चर्चा है कि चिराग पासवान यूपी में बीजेपी के लिए ‘अतिरिक्त ताकत’ बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें समय रहते साध लिया जाए। अगर गठबंधन में बात नहीं बनी, तो वे कुछ सीटों पर स्वतंत्र रूप से लड़कर अपनी ताकत भी दिखा सकते हैं। हालांकि, फिलहाल वे एनडीए के मंच से ही आगे बढ़ने की रणनीति अपना रहे हैं।
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