एनआईएच ने भारतीय मूल के प्रोफेसर को किडनी पर रिसर्च के लिए दिए 10 करोड़ रु.

अमेरिका के नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) ने ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में औषधि विज्ञान के भारतीय मूल के प्रोफेसर ताहिर हुसैन को किडनी से जुड़े एक अध्ययन के लिए 10 करोड़ रु. की राशि प्रदान की है.

यह राशि एक गुर्दे की कोशिका की जांच करने के लिए दी गई है जो मोटापा के कारण होने वाले सूजन से किडनी को पहुंचने वाली क्षति को रोक सकती है. हुसैन ने बताया कि अगर एटी 2 आर प्रोटीन को हम सक्रिय करने में सफल हो सके तो वह किडनी की पुरानी और गंभीर समस्याओं से निजात पाने में मददगार साबित हो सकता है.

मूल रूप से भारत के रहने वाले और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एलुमनी हुसैन किडनी पर सूजन के प्रभावों का अध्ययन करेंगे. उन्होंने कहा- ‘इस अनुदान के लिए मैं जो प्रस्ताव दे रहा हूं वह यह है कि गुर्दे में कुछ कोशिकाएं होती हैं वह गुर्दे की रक्षा कर सकती हैं.’ हुसैन ने भारत के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बीएससी (रसायनशास्त्र), एमएससी, एमफिल और पीएचडी (बायोकेमेस्ट्री) किया है. इसके बाद उन्होंने न्यूयार्क के ईस्ट कैरोलिना विश्वविद्यालय से पोस्ट डॉक्टरेट (औषधि विज्ञान) किया. हुसैन ने भारत के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बीएससी (रसायनशास्त्र), एमएससी, एमफिल और पीएचडी (बायोकेमेस्ट्री) किया है. इसके बाद उन्होंने न्यूयार्क के ईस्ट कैरोलिना विश्वविद्यालय से पोस्ट डॉक्टरेट (औषधि विज्ञान) किया.

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