नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बुधवार, 7 जनवरी को 26 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इन 26 नक्सलियों में से 13 पर 65 लाख रुपये का इनाम था।
सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने जानकारी दी कि इस 26 नक्सलियों में सात महिलाएं भी शामिल थीं। इन सभी नक्सलियों ने ‘पुणे मार्गेम’ योजना के तहत अपने सामान्य जीवन में लौटने का निर्णय लिया है। इसके लिए इन सभी नक्सलियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और सीआरपीएफ के अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
पुलिस अधीक्षक ने जानकारी देते हुए आगे बताया कि ये नक्सली पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड डिवीजन और आंध्र ओडिशा बॉर्डर डिवीजन के माओवादी संगठनों में सक्रिय थे। इन नक्सलियों का नाम छत्तीसगढ़ के अभूझमाद, सुकमा और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में हिंसा की कई घटनाओं में शामिल था।
पुलिस ने कहा कि वे राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से भी प्रभावित थे। कंपनी पार्टी कमेटी की सदस्य 35 वर्षीय लाली उर्फ मुचाकी आयते लखमू पर 10 लाख रुपये का इनाम था।
अधिकारी ने बताया कि लाली हिंसा की कई बड़ी घटनाओं में शामिल थी, जिनमें 2017 में कोरापुट रोड (ओडिशा) पर एक वाहन को निशाना बनाकर किया गया आईईडी विस्फोट भी है, जिसमें 14 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे।
अधिकारी ने बताया कि इन नक्सलियों में अन्य चार प्रमुख ने भी आत्मसमर्पण किया है। इनमें हेमला लखमा (41), आसमिता उर्फ कमलू सन्नी (20), रामबती उर्फ पदम जोगी (21) और सुंदरम पाले (20) का नाम भी शामिल है। इन चारों नक्सलियों पर कुल 8 लाख रुपये का इनाम था।
अधिकारी ने जानकारी दी कि लखमा साल 2020 में सुकमा के मिनपा में हुए हमले में शामिल थी, जिसमें 17 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।
50,000 रुपये की सहायता राशि
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 50,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है और सरकार की नीति के अनुसार उनका पुनर्वास किया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बाकी माओवादी संगठन से जुड़े सभी लोगों से भी हिंसा छोड़ने की अपील की। इसके साथ ही उन्हें सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का आश्वासन दिया।
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