नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेना दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना के जवान निःस्वार्थ सेवा और अटूट संकल्प का प्रतीक हैं, जो हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उनका कर्तव्यबोध पूरे देश में विश्वास और कृतज्ञता का भाव उत्पन्न करता है। उन्होंने कर्तव्य पथ पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अलग-अलग संदेश साझा करते हुए कहा कि दुर्गम क्षेत्रों से लेकर बर्फीली चोटियों तक भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम हर देशवासी को गौरवान्वित करता है। सीमा पर तैनात जवानों का देश हृदय से अभिनंदन करता है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसमें उन्होंने सशस्त्र बलों के साहस, आत्मविश्वास और कर्तव्य के शाश्वत भाव की प्रशंसा की। उन्होंने कहा:
अस्माकमिन्द्रः समृतेषु ध्वजेष्वस्माकं या इषवस्ता जयन्तु।
अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्त्वस्माँ उ देवा अवता हवेषु॥”
(अर्थ- हमारे ध्वज युद्ध में उठे हों, तब हमारे शस्त्र विजयी हों।
हमारे वीर सदा श्रेष्ठ और अग्रणी रहें।
हे देवताओं, युद्ध और संकट की घड़ी में हमारी रक्षा करना।)
यह श्लोक राष्ट्र और सेना के लिए विजय, वीरता और ईश्वर की कृपा की कामना करता है। इसमें सैनिकों के शौर्य, पराक्रम और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उनके अदम्य संकल्प को दर्शाया गया है।
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