मनरेगा को सियासी हथियार बनाने की तैयारी में कांग्रेस, राहुल गांधी आज रायबरेली में करेंगे चौपाल

लखनऊ: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस इस मुद्दे को सियासी हथियार बनाते हुए देशभर में पदयात्रा, पंचायतें और चौपालों के माध्यम से जनआंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है। इसकी शुरुआत कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली से करेंगे।

 

बताया जा रहा है कि इस दौरान राहुल गांधी ग्रामीण श्रमिकों से संवाद करेंगे और उनके अधिकारों, रोजगार तथा सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएंगे।

 

कांग्रेस महासचिव एवं लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा है कि 20 जनवरी को कांग्रेस नेता राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक मनरेगा चौपाल में शामिल होंगे। इस दौरान राहुल गांधी ग्रामीण श्रमिकों से संवाद करेंगे और उनके अधिकारों, रोजगार तथा सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएंगे।

 

केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ जनविरोधी बताए जा रहे ‘वीबी-जी राम जी’ एक्ट के खिलाफ विरोध की एक मजबूत रोशनी बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन देश के कोने-कोने तक फैल रहा है और मजदूरों व पंचायतों में उत्साह भर रहा है। कांग्रेस का इरादा पूरी तरह स्पष्ट है और जब तक मनरेगा अपने मूल स्वरूप में वापस नहीं आ जाता, तब तक यह संघर्ष नई ताकत के साथ जारी रहेगा।

 

दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने हाल ही में मनरेगा के नियमों में अहम बदलाव किए हैं। सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), 2025” कर दिया है, जिसे संक्षेप में “जी राम जी” या “वीबी-जी राम जी” कहा जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन बदलावों से योजना अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी।

 

हालांकि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का आरोप है कि नाम बदलने और नियमों में संशोधन के जरिए मनरेगा की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है। नए बदलावों के तहत फंडिंग पैटर्न में भी परिवर्तन किया गया है। पहले जहां मनरेगा की पूरी फंडिंग केंद्र सरकार करती थी, अब राज्यों को भी इसमें हिस्सेदारी करनी होगी। वहीं भुगतान व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है, जिसके तहत पहले 15 दिनों में मजदूरी का भुगतान होता था, अब इसे साप्ताहिक आधार पर करने का प्रावधान किया गया है।

 

कांग्रेस का कहना है कि ये बदलाव ग्रामीण गरीबों और मजदूरों के हित में नहीं हैं और इससे रोजगार गारंटी की अवधारणा प्रभावित होगी। इसी को लेकर पार्टी ने ‘मनरेगा बचाव संग्राम’ के जरिए केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है।

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