नई दिल्ली : भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने गुरुवार को पान मसाला और गुटखा की पैकिंग में बायो-प्लास्टिक (जैव-अपघट्य प्लास्टिक) के इस्तेमाल को लेकर अहम बैठक की। इस बैठक का मकसद अब तक हुए काम की समीक्षा और आगे की कार्ययोजना तय करना था।
बैठक में विज्ञान, पर्यावरण, जैव-प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा, उद्योग, मानक निर्धारण संस्थानों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय ने गुरुवार को दी गई जानकारी में बताया कि बैठक में पान मसाला और गुटखा के छोटे सैशे को लेकर चर्चा की गई जो पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या है क्योंकि ये जल्दी नष्ट नहीं होते। प्लास्टिक के कारण प्रदूषण बढ़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए पॉली लैक्टिक एसिड जैसे बायोडिग्रेडेबल पदार्थों को अच्छे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी लागत भी ज्यादा नहीं है।
पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि बायो-प्लास्टिक की परिभाषा को स्पष्ट करने पर काम चल रहा है, ताकि इनके लिए सही मानक और जांच प्रक्रिया तय की जा सके।
वहीं, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने कहा कि नई पैकिंग सस्ती होने के साथ स्वाद और खुशबू को सुरक्षित रखे, खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करे
और इसमें प्लास्टिक या एल्युमिनियम फॉयल बिल्कुल न हो।
बैठक में यह भी बताया गया कि अभी उपलब्ध कई बायोडिग्रेडेबल सामग्री केवल खास फैक्ट्रियों में ही नष्ट हो पाती हैं, जिससे इनके संग्रह और निपटान की चुनौती बनी रहती है।
बैठक में आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे जैसे संस्थानों और कई उद्योगों ने अपने सुझाव और समाधान रखे।
बैठक में प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि कुछ उद्योगों के पास अच्छे विकल्प मौजूद हैं लेकिन उन्हें वैज्ञानिक रूप से जांचना और प्रमाणित करना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि उद्योग अपने नमूने सीआईपीईटी को भेजें और अगली बैठक से पहले एक स्पष्ट कार्य-प्रणाली तैयार करें।
उन्होंने कहा कि अब केवल शोध नहीं बल्कि परीक्षण, प्रमाणन और मानकीकरण की दिशा में तेजी से काम करना होगा।
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