राजनीतिक हिंसा किसी भी रूप में लोकतंत्र के खिलाफः सदानंदन

नई दिल्ली : राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सोमवार को चर्चा की शुरुआत करते हुए नामित सदस्य सी. सदानंदन मास्टर ने कहा कि जो लोग आज संसद में लोकतंत्र और मानवता की बातें कर रहे हैं, उन्होंने ही 31 साल पहले उन पर जानलेवा हमला किया था। सदन में

 

व्हीलचेयर पर बैठकर इसलिए आए हैं क्योंकि एक संगठित आपराधिक गिरोह ने उन पर हमला कर उनके दोनों पैर काट दिए थे। उन्होंने इस हमले का संबंध अपरोक्ष रूप से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से जोड़ते हुए कहा कि हमला करने वाले लोग “इंकलाब ज़िंदाबाद” के नारे लगा रहे थे।

 

सदन में टेबल पर रखे कृत्रिम पैर को दिखाते हुए सदानंदन ने कहा कि वे क्यों खड़े होकर नहीं बोल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह हमला तब हुआ था, जब वह अपने चाचा के घर से लौट रहे थे। उन्होंने कहा, “आप लोकतंत्र और मानवता की बात करते हैं, लेकिन आपकी राजनीति हिंसा पर आधारित है। राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए घातक है।”

 

सदानंदन मास्टर के बयान के बाद विपक्षी सदस्यों ने विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान माकपा सदस्य जॉन ब्रिटास ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर उठाते हुए कहा कि राज्यसभा में किसी भी वस्तु को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है। इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वे सदस्य से कृत्रिम अंग हटाने के निर्देश देंगे, उसके बाद सदानंदन ने अपने कृत्रिम अंग को टेबल से हटाते हुए अपना वक्तव्य जारी रखा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत किसी एक सरकार या एक पीढ़ी का लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह एक लगातार चलने वाली यात्रा है।

 

उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश इस समय अमृत काल में प्रवेश कर चुका है और विकसित भारत का संकल्प दीर्घकालिक सोच और सामूहिक प्रयासों से ही पूरा होगा।

 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में नारी शक्ति के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से महिला कैडेट्स के पहले बैच का पास होना इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं आज देश के विकास और सुरक्षा में सबसे आगे खड़ी हैं।

 

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश के आत्मविश्वास को और मजबूत करती है और यह दिखाती है कि भारत में महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।

 

सांसद ने विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा,

 

“विरोध केवल विरोध के लिए नहीं होना चाहिए। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर हमें एकजुट होकर देश के साथ खड़ा होना चाहिए।”

 

सदानंदन ने कहा कि विकसित भारत की नींव एक दूरदर्शी प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई है, आज उसकी दीवारें खड़ी हो रही हैं और आने वाले समय में इस इमारत को पूरा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इतिहास यह दर्ज करे कि जब एक महान भारत के निर्माण का समय आया, तब संसद एकजुट होकर खड़ी रही। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल अपने नागरिकों का कल्याण नहीं है, बल्कि देश की एक वैश्विक भूमिका भी है- दुनिया को अच्छाई, शांति और मानवता के मार्ग पर आगे ले जाने की।

 

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब सरकार और विपक्ष मिलकर राष्ट्रहित में कार्य करेंगे। भाजपा सदस्य मेधा विश्राम कुलकुर्णी ने सदानंदन की बातों का समर्थन किया।

 

चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह ने सरकार पर सामाजिक समरसता बिगाड़ने और आर्थिक असमानता बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के लिए एक खास विचारधारा जिम्मेदार रही है। हालांकि पहले उन्होंने आरएसएस का नाम लिया था जिस पर आपत्ति जताते हुए सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या से आरएसएस का कोई संबंध नहीं है। बिना किसी तथ्यों के आक्षेप लगाना सही नहीं है। इस पर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि नियम 238 और 235 के तहत धन्यवाद प्रस्ताव पर बिना किसी तथ्यों के किसी भी बातों को सदन में नहीं रखा जा सकता। इसलिए इन नियमों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

 

सदन में हंगामे के बाद दिग्विजय ने कहा कि सरकार के सबका साथ सबका विकास में अल्पसंख्यक, पिछड़ी जाति, अनुसूचित जनजाति के लोग शामिल नहीं हैं। सरकार के नारे में न सबका साथ है और न ही सबका विकास है। देश में आर्थिक असमानता बढ़ रही है।

 

तृणमूल कांग्रेस की सदस्य सागरिका घोष

 

ने कहा कि मौजूदा सरकार “इनकार की सरकार” है और राष्ट्रपति के अभिभाषण को वह डी ग्रेड देंगी। घोष ने कहा कि सरकार जमीनी सच्चाइयों को स्वीकार करने के बजाय इसे इनकार कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में देश की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। सरकार का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ धरातल पर दिखाई नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में नफरत भरे भाषण बढ़े हैं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं।

 

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