नई दिल्ली : भारत और फ्रांस ने दोहरा कराधान बचाव करार (डीटीएसी) में संशोधन किया है। इसके साथ ही सबसे तरजीही देश (एमएफएन) का प्रावधान भी हटा दिया गया है, जिससे कराधान व्यवस्था में अधिक स्पष्टता और निश्चितता आएगी।
वित्त मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में बताया कि भारत और फ्रांस ने दोहरा कराधान वंचन संधि (डीटीएसी) को अद्यतन करने के लिए संशोधन प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत-फ्रांस डीटीएसी के प्रोटोकॉल में संशोधन करने से निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए कर संधि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनेगी। मंत्रालय के मुताबिक फ्रांस के राष्ट्रपति की हालिया भारत यात्रा के दौरान 29 सितंबर, 1992 (‘भारत-फ्रांस डीटीएसी’) के दोहरे कराधान वंचन संधि में संशोधन करने वाले एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस संशोधन प्रोटोकॉल पर भारत सरकार के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष रवि अग्रवाल और भारत में फ्रांस के राजदूत थिएरी माथाउ ने अपनी-अपनी सरकारों की ओर से हस्ताक्षर किए।
वित्त मंत्रालय के अनुसार इस संशोधन से पहले जहां लाभांश से आय पर कर की दर 10 प्रतिशत यानी एक समान थी, उसमें अब बदलाव किया गया है। कम से कम 10 फीसदी पूंजी रखने वालों के लिए पांच फीसदी और अन्य सभी मामलों में अब 15 फीसदी कर लगेगा। यह संशोधन भारत अमेरिका दोहरा कराधान वंचन संधि की परिभाषा के साथ तालमेल बिठाकर ‘तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क’ की परिभाषा को भी संशोधित करता है और सर्विस पीई को जोड़कर ‘स्थायी प्रतिष्ठान’ के दायरे का विस्तार करता है।
मंत्रालय के मुताबिक संशोधन प्रोटोकॉल के माध्यम से पेश किए गए परिवर्तन दोनों देशों के कानूनों के तहत आंतरिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद और दोनों देशों के बीच सहमत शर्तों के अधीन प्रभावी होंगे। इस संशोधन प्रोटोकॉल भारत-फ्रांस डीटीएसी को नवीनतम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार अपडेट करता है, जो भारत और फ्रांस दोनों के हितों को संतुलित करता है। इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार अपडेट करता है। संशोधित प्रोटोकॉल करदाताओं को कर संबंधी अधिक निश्चितता प्रदान करेगा और भारत और फ्रांस के बीच निवेश, प्रौद्योगिकी और कर्मियों के प्रवाह को बढ़ावा देगा और इस तरह दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा।
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