कोलकाता : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)
ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। शनिवार को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, दक्षिण कोलकाता के इस हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र से कुल 47 हजार 94 मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। इसके अलावा, 14154 मतदाताओं को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है, जिनका भविष्य दस्तावेज सत्यापन के बाद तय होगा। यदि इन विचाराधीन नामों को भी हटा दिया जाता है, तो भवानीपुर के कुल मतदाता आधार में एक बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2021 के भवानीपुर उपचुनाव में ममता बनर्जी ने करीब 58 हजार मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। अब हटाए गए 47 हजार से अधिक नामों की संख्या जीत के उस अंतर के काफी करीब पहुंच गई है, जिससे आगामी चुनाव के समीकरणों में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। बीओ 4 नवंबर, 2025 को शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया के समय इस सीट पर दो लाख छह हजार 295 मतदाता थे, लेकिन दिसंबर, 2025 की ड्राफ्ट लिस्ट और शनिवार की फाइनल लिस्ट के बाद यह संख्या काफी कम हो गई है।
इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने इस कटौती को जायज ठहराते हुए कहा कि ये नाम उन मतदाताओं के थे जो या तो फर्जी थे या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में फर्जी नामों के हटने के बाद ममता बनर्जी में दोबारा भवानीपुर से चुनाव लड़ने का साहस नहीं होगा।
वहीं, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री को इसी सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी और दावा किया कि अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही।——————–
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