छत्तीसगढ़ में 108 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

जगदलपुर : बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित लालबाग पुलिस ऑडिटोरियम के शौर्य भवन में बुधवार को ‘पूना मारगेम- पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के अंतर्गत आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े कुल 108 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्याग कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया।

 

माओवादियों ने नागरिकों, परिजनों, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नक्स. अभि) विवेकानंद, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (बीएसएफ) सिवांग नामग्याल, पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी, पुलिस महानिरीक्षक सीआरपीएफ शालीन, पुलिस महानिरीक्षक छसबल बीएस. ध्रुव, बस्तर संभाग के सभी सात जिलों के पुलिस अधीक्षकगण, केंद्रीय सुरक्षाबलों तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण की उपस्थिति में आत्मसमर्पण किया।

 

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में माओवादी संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी शामिल रहे। इनमें 5 डिवीजनल कमेटी सदस्य, 2 जोनल स्तर के पीएलजीए कंपनी के प्रमुख पदाधिकारी, 15 प्लाटून पार्टी कमेटी के सदस्य, 21 एरिया कमेटी सदस्य तथा 63 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन सभी पर मिलाकर लगभग 3.29 करोड़ रुपये की इनाम राशि घोषित थी। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों से प्राप्त सूचनाओं एवं अन्य खुफिया जानकारियों के आधार पर सुरक्षा बलों ने विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए विभिन्न हथियार बरामद किए हैं। इनमें छह एके-47 राइफल, एक एके-47 टीएआर, 10 इंसास राइफल, एक कार्बाइन, पांच एसएलआर राइफल, एक 7.62 मिमी एलएमजी, दो 5.56 मिमी एलएमजी, एक .303 मिमी एलएमजी, बीस .303 राइफल, 12 बोर की 25 रायफलें, 11 बीजीएल लांचर, एक 51 मिमी मोर्टार, तीन .315 बोर राइफल, मजल लोडिंग राइफल, 13 भरमार शामिल हैं। इस प्रकार विभिन्न स्थानों से कुल 101 हथियार बरामद किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान नारायणपुर जिले से सर्वाधिक 49 हथियार, बस्तर से 24, सुकमा से 12, बीजापुर से 09, दंतेवाड़ा से 05 तथा कांकेर से 02 हथियार बरामद किए गए।

 

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने बचे हुए माओवादियों से अपील की है कि हिंसा छोंडकर हथियार त्यागकर मुख्यधारा में लौंटे। शासन उनके सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्जवल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ”पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन“ पहल के माध्यम से हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को पुनर्वास, सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और विश्वास के वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाना है, ताकि बस्तर क्षेत्र में शांति और प्रगति की नई संभावनाएं साकार हो सकें।

 

पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि राज्य शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त उन्हें समाज में सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्हाेने कहा कि स्थानीय समुदाय, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों के सहयोग से क्षेत्र में विश्वास निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी विश्वास के वातावरण के परिणामस्वरूप अनेक भटके हुए युवा पुनः सामान्य जीवन की ओर लौटने का निर्णय ले रहे हैं।

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