नई दिल्ली : केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को कहा कि वह भारत में 2027 तक फार्मूला 1 की वापसी के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए उन कर संबंधी बाधाओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है, जिनकी वजह से 2013 के बाद यह रेस भारत से बंद हो गई थी।
मीडिया से बातचीत में मांडविया ने बताया कि ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर रेस कराने की योजना है और कम से कम तीन कंपनियों ने इस ट्रैक के संचालन में रुचि दिखाई है। मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत में 2027 में फॉर्मूला वन रेस होगी और पहली रेस बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में आयोजित की जाएगी। खेल मंत्री ने कहा कि सरकार आयोजकों के लिए इस परियोजना को व्यावहारिक बनाने के लिए टैक्स में राहत देने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद करेगी। उन्होंने बताया कि इस पर अगले छह महीनों में विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत को खेल आयोजनों के लिए एक सुरक्षित और बेहतर विकल्प माना जा रहा है। सरकार पहले मोटो जीपी रेस आयोजित करने की योजना बना रही है, उसके बाद फॉर्मूला वन की वापसी का रास्ता तैयार किया जाएगा।
गौरतलब है कि भारत में इंडियन ग्रां प्री 2011 से 2013 तक तीन बार आयोजित हुआ था, लेकिन टैक्स और प्रशासनिक दिक्कतों के चलते इसे बंद कर दिया गया था। हालांकि, फॉर्मूला वन के मालिक लिबर्टी मीडिया से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 2027 में रेस होना फिलहाल मुश्किल लग रहा है, लेकिन भारत एक बड़ा संभावित बाजार जरूर है।
फॉर्मूला वन के अनुसार भारत में करीब 7.9 करोड़ प्रशंसक हैं, जो इसे एक अहम बाजार बनाता है। अडानी ग्रुप जेपी समूह की संपत्तियों, जिसमें ग्रेटर नोएडा का यह ट्रैक भी शामिल है, के अधिग्रहण की प्रक्रिया में है और वह भी इस रेस को फिर से शुरू करने में रुचि दिखा चुका है। हालांकि, फॉर्मूला वन के मौजूदा कैलेंडर में पहले से ही 24 रेस शामिल हैं और नए देशों की दिलचस्पी भी बढ़ रही है, ऐसे में भारत के लिए जगह बनाना आसान नहीं होगा। एक फॉर्मूला वन रेस आयोजित करने की लागत भी काफी अधिक होती है, जो सालाना 2 करोड़ डॉलर से 6 करोड़ डॉलर तक हो सकती है।
भारत में पहले भी बड़े मोटरस्पोर्ट आयोजन लंबे समय तक नहीं चल पाए हैं। 2023 में शुरू हुआ मोटो जीपी एक ही सीजन के बाद बंद हो गया, जबकि हैदराबाद में आयोजित फॉर्मूला ई रेस भी सरकार बदलने के बाद कैलेंडर से बाहर हो गई। फिलहाल, सरकार और संबंधित संस्थाएं मिलकर प्रयास कर रही हैं कि आने वाले समय में भारत में एक बार फिर फॉर्मूला वन की गूंज सुनाई दे।
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