संसद में नारी वंदन अधिनियम का विरोध करेगी कांग्रेस

नई दिल्ली : संसद के विशेष तीन दिवसीय बैठक से पहले महिला आरक्षण कानून और संसदीय सीटों के विस्तार को लेकर विपक्षी इंडी गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बैठक की। इस बैठक में महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन और सीटों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे पर रणनीति तय की गई। बैठक के बाद विपक्षी गठबंधन ने संयुक्त पत्रकार वार्ता करके इन विधेयकों का विरोध करने का ऐलान किया।

 

बैठक में राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, जयराम रमेश, सैयद नसीर हुसैन, राष्ट्रीय जनता दल से तेजस्वी यादव, आम आदमी पार्टी से संजय सिंह, शिव सेना (यूबीटी) से अरविंद सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस (एसपी) से सुप्रिया सुले, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) से टीआर बालू, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से सागरिका घोष, समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल और समेत कई नेता मौजूद रहे।

 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक के बाद कहा कि विपक्षी दल महिला आरक्षण बिल के पक्ष में हैं, लेकिन जिस तरीके से सरकार ने इसे पेश किया है, वह राजनीतिक रूप से प्रेरित है और विपक्षी दलों को दबाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि 2010 और 2023 में महिला आरक्षण से जुड़ा संवैधानिक संशोधन सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था और अब इसे लागू किया जाना चाहिए। सरकार परिसीमन और जनगणना को बहाना बनाकर आरक्षण लागू करने में देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल एकजुट होकर संसद में इस बिल का विरोध करेंगे, क्योंकि यह महिलाओं के अधिकारों को टालने की कोशिश है।

 

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि बैठक में तीन विधेयकों पर चर्चा हुई है। एक संविधान संशोधन और दो वैधानिक बिल। उन्होंने कहा कि 2023 में अनुच्छेद 334ए के तहत महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन सरकार ने इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन की शर्तें जोड़ दीं। हमारी मांग थी कि यह 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू हो, लेकिन सरकार ने इसे टाल दिया।

 

उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव प्रचार के बीच यह बिल लेकर आई है और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ रही है। यह खतरनाक है क्योंकि इससे कई राज्यों का अनुपात घटेगा और छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होगा। विपक्षी दल चाहते हैं कि मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों के आधार पर महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया जाए और यह 2029 के चुनाव से लागू हो। परिसीमन के प्रावधान को विपक्षी दल किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।

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