पेरिस: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करोड़ों रुपये के घोटाले का मुख्य आरोपी और भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी अब अपनी प्रत्यर्पण प्रक्रिया को रोकने के लिए नई कानूनी चालें चल रहा है। लंदन की अदालतों से सभी झटके मिलने के बाद, नीरव मोदी ने अब ब्रिटेन की सीमाओं से बाहर निकलकर फ्रांस स्थित यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) का दरवाजा खटखटाया है। भारत प्रत्यर्पण की अंतिम कगार पर खड़े नीरव मोदी का यह कदम समय बचाने की एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है।
ब्रिटेन में रास्ते बंद, अब मानवाधिकार का सहारा
लंदन हाईकोर्ट ने बीती 25 मार्च को नीरव मोदी की अपील खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसके पास ब्रिटेन में कानूनी तौर पर बचने का कोई विकल्प नहीं रह गया था। अब नीरव ने मानवाधिकारों का तर्क देते हुए एक नया रास्ता चुना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं बल्कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को लंबा खींचने और भारत वापसी को टालने की एक कोशिश है।
क्या है ‘रूल 39’, जिससे राहत की उम्मीद लगा रहा मोदी?
नीरव मोदी ने रूल 39 (Rule 39) के तहत आवेदन दाखिल किया है। इस नियम के तहत आरोपी यह दलील देता है कि यदि उसे प्रत्यर्पित किया गया, तो उसे ‘अपूरणीय नुकसान’ हो सकता है। इसी आधार पर वह अदालत से अंतरिम रोक (Interim Relief) की मांग करता है। यह पूरी प्रक्रिया लिखित होती है और आमतौर पर जज 48 घंटे के भीतर अपना फैसला सुना देते हैं। जब तक इस आवेदन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक प्रत्यर्पण की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगी रह सकती है।
आंकड़े नहीं दे रहे गवाही: सफलता की दर बेहद कम
नीरव मोदी की इस ‘चाल’ के सफल होने की संभावना काफी कम नजर आ रही है। अगर पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2025 में ECHR में आए 2701 मामलों में से केवल 222 मामलों को ही मंजूरी मिली थी। इसका मतलब साफ है कि यूरोपियन कोर्ट ऐसे मामलों में बहुत कम दखल देता है और ज्यादातर याचिकाओं को खारिज कर दिया जाता है। ऐसे में कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मोदी की केवल एक अस्थायी राहत साबित हो सकती है।
पीएनबी घोटाले का काला सच
गौरतलब है कि नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक से धोखाधड़ी कर अरबों रुपये हड़पने का आरोप है। भारत सरकार पिछले कई वर्षों से उसे वापस लाने के लिए ब्रिटेन सरकार और वहां की अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ रही है। ब्रिटेन की लगभग सभी निचली और ऊंची अदालतों ने नीरव के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उसके प्रत्यर्पण को हरी झंडी दे दी है। अब देखना यह होगा कि यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का फैसला भारत की इस बड़ी कामयाबी में कितनी देर लगाता है।
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