देश में ईंधन आपूर्ति सामान्य, भारतीयों की सुरक्षा के लिए सरकार सतर्क

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर केंद्र सरकार ने बताया कि तेल आपूर्ति में आ रही रुकावटों के बावजूद देश में तेल और गैस आपूर्ति की कोई समस्या नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं, बंदरगाहों का संचालन सामान्य है और विदेशों में भारतीयों की सुरक्षित वापसी तथा सहायता के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

 

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद देश में घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी न करें, अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा रखें। एलपीजी उपभोक्ताओं को डिजिटल माध्यम से बुकिंग करने और वितरकों के पास अनावश्यक भीड़ न लगाने की सलाह दी गई है। साथ ही, पीएनजी, इलेक्ट्रिक या इंडक्शन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने और ऊर्जा की बचत करने का आग्रह किया गया है।

 

केंद्र ने कहा कि रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर संचालित हो रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। घरेलू एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी गई है और किसी भी वितरण केंद्र पर गैस खत्म होने की स्थिति नहीं है। 17 अप्रैल को 52 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी की गई। वहीं, 23 मार्च से अब तक 5 किलोग्राम के 17.25 लाख से अधिक एफटीएल सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, दवा, स्टील, ऑटोमोबाइल और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए प्राथमिकता दी गई है। साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलोग्राम सिलेंडरों की उपलब्धता दोगुनी कर दी गई है।

 

वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को संकट पूर्व स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक बहाल किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा ऑटो एलपीजी की बिक्री में 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पीएनजी विस्तार सुधारों से जुड़े अतिरिक्त वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन दिए जा रहे हैं। सरकार ने पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के लिए भी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं, जिससे एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके।

 

आपूर्ति और मांग के संतुलन के लिए बुकिंग अंतराल को शहरी क्षेत्रों में 21 से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक किया गया है। साथ ही केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों की अतिरिक्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। राज्यों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जमाखोरी और कालाबाजारी पर कार्रवाई के लिए सशक्त किया गया है। 17 अप्रैल को देशभर में 2500 से अधिक छापे मारे गए, जिनमें 750 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए। तेल विपणन कंपनियों ने 263 एलपीजी वितरकों पर जुर्माना लगाया और 67 को निलंबित किया है।

 

प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में भी सरकार ने आपूर्ति को प्राथमिकता दी है। उर्वरक संयंत्रों को गैस आवंटन लगभग 95 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है, जबकि अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को 80 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति की जा रही है। मार्च 2026 से अब तक 4.76 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए जा चुके हैं और 5.33 लाख नए उपभोक्ताओं का पंजीकरण हुआ है। 37,500 से अधिक उपभोक्ताओं ने एलपीजी छोड़कर पीएनजी अपनाया है।

 

ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है। इसके साथ ही डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया गया है, ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। देशभर में पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं और कहीं भी आपूर्ति बाधित नहीं है।

 

समुद्री क्षेत्र में भी स्थिति सामान्य बनी हुई है। पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि देश के सभी बंदरगाहों पर संचालन सामान्य है और कहीं भी भीड़भाड़ नहीं है। क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी भारतीय ध्वज वाले जहाज से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है। अब तक 2487 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी कराई जा चुकी है।

 

विदेश मंत्रालय ने बतया कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। भारतीय मिशन 24 घंटे हेल्पलाइन संचालित कर रहे हैं और स्थानीय सरकारों के साथ संपर्क में हैं। 28 फरवरी से अब तक लगभग 10.68 लाख यात्री इस क्षेत्र से भारत लौट चुके हैं। ईरान में भारतीय दूतावास ने अब तक 2373 भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते भारत भेजने में सहायता की है, जिनमें 1041 छात्र और 657 मछुआरे शामिल हैं।

 

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