एकात्म पर्वः ओंकारेश्वर में दिखा अद्वैत और एआई का संगम

भोपाल : मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की प्रसिद्ध तीर्थनगरी ओंकारेश्वर के ओंकार पर्वत पर आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग (मप्र शासन) द्वारा आयोजित पांच दिवसीय एकात्म पर्व के तीसरे दिन रविवार को अद्वैत दर्शन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का संगम देखने को मिला।

 

21 अप्रैल तक चलने वाले एकात्म पर्व के तीसरे दिन देश के विभिन्न वक्ताओं एवं संतो की उपस्थिति में अद्वैत दर्शन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सर्वम एआई के संस्थापक डॉ. प्रत्युष कुमार ने कहा कि भारत अपनी अद्वैत आधारित गहरी दार्शनिक परंपरा के कारण एआई को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखता है। जहां दुनिया एआई को लेकर नौकरी और बदलाव के डर में है, वहीं भारत आशावादी है। उन्होंने कहा कि एआई को दर्शन से जोड़कर ही उसे एथिकल बनाया जा सकता है।

 

डॉ. प्रत्युष कुमार ने कहा कि एआई एक यूनिफाइड सिस्टम है, जो जटिल कार्यों को सरल बना सकता है। उन्होंने कहा कि एआई को इस तरह विकसित किया जा सकता है कि यह मानव जीवन को आसान बनाए, लेकिन इसका नैतिक उपयोग दार्शनिक मूल्यों से जुड़कर ही संभव है। उनका मानना है कि आने वाले समय में एआई मानव जैसी भावनाएं और संवाद क्षमता भी विकसित कर सकता है।

 

भारत की तकनीकी भूमिका पर आत्ममंथन

 

उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दशकों में भारत का तकनीकी योगदान सीमित रहा है, लेकिन भविष्य में अद्वैत दर्शन के साथ AI का समन्वय भारत को वैश्विक नेतृत्व दिला सकता है। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर राहुल गर्ग ने कहा कि यदि भारत अपने प्रतिभाशाली युवाओं को अद्वैत की शिक्षा से जोड़ दे, तो ऐसे स्टार्टअप विकसित हो सकते हैं जो एआई को मूल्य और एकता आधारित दिशा देंगे।

 

स्वामी परम शिवानंद का ‘संस्कृति दर्शनम्’ प्रोजेक्ट

 

रामकृष्ण मिशन चेन्नई के स्वामी परम शिवानंद ने बताया कि वे वेदांत और आधुनिक तकनीक को जोड़कर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्य कर रहे हैं। उनकी परियोजना ‘संस्कृति दर्शनम्’ का उद्देश्य एआई और मिश्रित वास्तविकता के माध्यम से वेदांत को व्यावहारिक बनाना है।

 

श्रौत इष्टि की ज्योति से ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया है। श्रृंगेरी से आए 50 आचार्य प्रतिदिन वैदिक अनुष्ठान कर रहे हैं, जिनमें मंत्र पारायण, यज्ञ और वेद पारायण शामिल हैं। श्रौत इष्टि को वेदों में श्रेष्ठतम कर्म माना गया है, जिसमें अग्नि में आहुति देकर ब्रह्मांडीय संतुलन और देव-मानव संबंधों का संतुलन स्थापित किया जाता है। यह केवल अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान का माध्यम भी है।

 

पुण्य सलिला नर्मदा के तट पर आयोजित ‘एकात्म पर्व’ में आध्यात्मिक चेतना और कला का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं, जिन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन और उनकी कालजयी रचनाओं को मंच पर जीवंत कर दिया।

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