नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे जुड़े पर्यावरणीय, सामाजिक और पारदर्शिता संबंधी मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 28 अप्रैल को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ग्रेट निकोबार यात्रा के बाद सरकार ने प्रेस बयान जारी कर ध्यान भटकाने का प्रयास किया।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी विस्तृत बयान में कहा कि सरकार द्वारा 01 मई को जारी प्रेस नोट में उन गंभीर चिंताओं का समाधान नहीं किया गया है, जो पहले से ही स्थानीय समुदायों, पर्यावरणविदों, मानवविज्ञानियों और विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा उठाई जा चुकी हैं। इन मुद्दों को लेकर उन्होंने स्वयं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री को सितंबर 2024 में पत्र लिखकर अवगत कराया था।
रमेश ने कहा कि यह द्वीप जैव विविधता के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील और विशिष्ट है। पिछले पांच वर्षों में यहां लगभग 50 नई प्रजातियों की पहचान की गई है, जिनमें पक्षी, सरीसृप और समुद्री जीव शामिल हैं। प्रस्तावित परियोजना स्थल गैलाथिया खाड़ी तटीय विनियमन क्षेत्र-1ए के अंतर्गत आता है, जहां बंदरगाह निर्माण की अनुमति नहीं होती। इस क्षेत्र में 20,000 से अधिक प्रवाल संरचनाएं मौजूद हैं और यह उत्तरी हिंद महासागर में विशाल लेदरबैक कछुओं के प्रजनन का प्रमुख स्थल माना जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया में शामिल संस्थानों की भूमिका पर भी प्रश्न उठते हैं। वन्यजीव संस्थान और प्राणी सर्वेक्षण जैसे संस्थानों को परियोजना से जुड़े अध्ययन और निगरानी कार्य दिए गए, जबकि इन्हीं संस्थानों की भूमिका मंजूरी प्रक्रिया में भी रही है, जिससे हितों के टकराव की स्थिति बनती है। कुछ स्वतंत्र संस्थानों को, जिन्होंने परियोजना पर आलोचनात्मक रुख अपनाया था, उन्हें प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
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