लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी सकती। आपको सिस्टम के साथ रहना है, तो नियम-कानून मानना शुरू करें। नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए, हम रोकेंगे नहीं।
मुख्यमंत्री योगी यहां सोमवार को एक हिन्दी दैनिक अखबार के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में अपना संबोधन दे रहे थे। उन्हाेंने कहा कि लोग पूछते हैं कि आपके यहां यूपी में क्या सड़कों पर सचमुच नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं कि कतई नहीं होती है। आप जाकर देख लो, नहीं होती है। सड़कें चलने के लिए हैं या कोई भी व्यक्ति चौराहे पर आकर तमाशा बना देगा? क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का, आवागमन बाधित करने का? जहां इसका स्थल है, वहां जाकर पढ़ो। याेगी ने कहा कि लोगों ने मुझसे कहा, कैसे होगा, हमारी संख्या ज्यादा है? हमने कहा, शिफ्ट में कर लो। घर में रहने की जगह नहीं है, तो संख्या नियंत्रित कर लो और सामर्थ्य नहीं है तो क्यों संख्या बढ़ाए जा रहे? आपको सिस्टम के साथ रहना है, तो नियम-कानून मानना शुरू करें। नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए। हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं। सामान्य नागरिक, बीमार व्यक्ति, कामगार, कर्मचारी सभी सड़कों पर चलते हैं, हम सड़क बाधित नहीं करने देंगे। प्यार से मानेंगे तो ठीक बात है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे। संवाद से मानेंगे तो ठीक नहीं तो संघर्ष से भी देख लें। बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का कार्य किया, देख ली सरकार की ताकत। सरकार हर सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है।
उत्तर प्रदेश की बदली तस्वीर का उल्लेख करते हुए याेगी ने कहा कि पिछली सरकारों में यह राज्य कट्टा-बम, दंगे और माफिया संस्कृति के लिए जाना जाता था, जबकि आज यूपी की पहचान ब्रह्मोस मिसाइल, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे, इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स और निवेश डेस्टिनेशन के रूप में है। कानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और सकारात्मक शासन की बदौलत प्रदेश बॉटम-2 से निकलकर टॉप-2 राज्यों में पहुंचा है। राज्य में अराजकता व अव्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस है। राह चलती बेटी से छेड़खानी करने वाले की रावण व दुर्योधन जैसी दुर्गति होगी।
सनसनी व फेक न्यूज समाज में अराजकता फैलाती
मौजूदा दौर की पत्रकारिता पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सनसनी व फेक न्यूज समाज में अराजकता फैलाती हैं, जबकि सकारात्मक और संवेदनशील पत्रकारिता लोकतंत्र को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी पत्रकारिता को नई ऊंचाई दी थी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की लेखनी ने आजादी को नई दिशा दी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पत्रकारिता को आंदोलन का आधार बनाया। कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी ने पत्रकारिता को देश की स्वाधीनता और सामाजिक न्याय का आधार बनाने का कार्य किया। 1975 में जब लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास हुआ, तब मूर्धन्य संपादकों व रिपोर्टरों ने इसे नाकाम कर दिया। लोकतंत्र में केवल विधायिका, न्यायपालिका या कार्यपालिका ही नहीं, मीडिया की भी सशक्त भूमिका है। आज डीप-फेक या फेक-न्यूज का खतरा हर जगह मंडरा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिपोर्टिंग को सनसनी पैदा करने का आधार बनाने की बजाय संवेदनशील बनाया जाता तो बहुत सारी जगहों पर लॉ एंड ऑर्डर की समस्या नहीं खड़ी होती। सनसनी फैलाने वाली न्यूज से रिपोर्टर, समाचार पत्र या मीडिया ग्रुप को तात्कालिक लाभ हो सकता है, लेकिन जब वही न्यूज फेक निकलती है तो कठघरे में भी खड़ा होना पड़ता है। हम लोग उसके लिए अलर्ट भी रहते हैं। क्योंकि किसी गलत खबर से एक बार आग लग गई तो फिर उसे बुझाने में समय लगता है। हम नहीं चाहते कि यूपी में फिर से दंगे-कर्फ्यू का माहौल बने। यूपी में किसी को अराजकता फैलाने की छूट नहीं है।
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