राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में बड़ा खुलासा : नपेंगे कई ‘सफेदपोश’ और बैंक अफसर, SIT का शिकंजा कसना शुरू!

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने आरोपितों के साथ ही उनके संरक्षकों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। आठ आरोपितों को जेल भेजने के बाद अब पुलिस इन लोगों के पीछे से उन्हें समर्थन देने वाले व्यक्तियों की तलाश में जुट गई है। इनमें बैंक अधिकारियों और गणनाकर्मी उपलब्ध कराने वाली एजेंसी पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। शनिवार को पुलिस ने इन आरोपितों के करीबी और बैंक के कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की, और इनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।

 

पुलिस अब यह पता करने में लगी है कि आरोपितों के किन परिवारजनों और करीबी लोगों का उनके जीवन में हाल ही में बदलाव आया है। इन लोगों के बैंक खातों की भी विस्तृत जांच की जाएगी। एसआइटी की प्रारंभिक जांच में दो बैंक अधिकारियों सहित कुछ कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, हालांकि अभी तक एफआइआर में किसी बैंककर्मी का नाम शामिल नहीं है।

 

पुलिस विवेचना के दौरान इनके नाम भी जोड़ सकती है। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) का कार्यकाल बढ़ाने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। आरोपितों को पुलिस ने जल्द ही गिरफ्तार कर लिया था।

 

गुरुवार को रामजन्मभूमि थाने में इस चोरी के मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज होते ही कुछ ही घंटों में पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। प्राथमिकी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम भी लगाया गया है, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि इसमें सरकारी कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है। फिलहाल, इन्हें अभी अज्ञात के रूप में शामिल किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोमवार को आरोपितों की कस्टडी रिमांड के लिए आवेदन किया जाएगा, ताकि उनके साथ विस्तार से पूछताछ की जा सके।

 

रिमांड पर पूछताछ के दौरान यह देखा जाएगा कि क्या केवल इन आठ आरोपितों की ही भूमिका है या फिर बैंक कर्मी, ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े अन्य कर्मचारी भी इसमें शामिल हैं। यह भी जांच की जाएगी कि ट्रस्टियों को इस मामले की जानकारी थी या नहीं, और यदि थी तो उन्होंने किस स्तर पर कार्रवाई की।

 

सूत्रों के अनुसार, गणना की निगरानी करने वाले रिटायर्ड बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव को एक नेता ने ट्रस्ट का कर्मचारी बनवाया था। वहीं, गबन के मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र की नियुक्ति भी एक नेता के कहने पर ट्रस्टी द्वारा की गई थी। इसके बाद, उसने बहनोई लवकुश मिश्र और क्षेत्र के करुणेश पांडेय को भी ट्रस्ट में शामिल कराया। अविनाश शुक्ल की नियुक्ति में भी किसी नेता का हाथ बताया जा रहा है। इस मामले की विवेचना कर रहे सीओ अयोध्या आशुतोष त्रिपाठी का कहना है कि यह बेहद संवेदनशील मामला है, इसलिए इसकी जांच किसी इंस्पेक्टर से नहीं बल्कि स्वयं सीओ से कराई जा रही है।

 

एसआइटी का कार्यकाल 5 जून को दान पात्र से चोरी का मामला सामने आने के बाद 13 जून को बढ़ाया गया था। उस समय, मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में गठित इस टीम को सात दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश था। एसआइटी ने 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट एसआइटी ने अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी थी।

 

हालांकि, 28 जून को एसआइटी का कार्यकाल समाप्त हो गया था, लेकिन सरकार ने जांच का समय और बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई बिंदुओं पर जांच लंबित है, और टीम भूमि खरीद में अनियमितता और दान आभूषणों के गायब होने के आरोपों की भी जांच कर सकती है।

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