तिरुनेलवेली : तमिलनाडु के ऐतिहासिक नेल्लैयप्पर-कांतिमति अम्मन मंदिर में आयोजित 520वें आणि महोत्सव के तहत रविवार को भव्य रथोत्सव श्रद्धा, आस्था और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। एशिया के प्रमुख एवं प्राचीन शिव मंदिरों में शामिल इस मंदिर के वार्षिक रथोत्सव में भाग लेने के लिए तमिलनाडु के विभिन्न जिलों से लाखों श्रद्धालु तिरुनेलवेली पहुंचे। चारों रथ मार्ग श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे और पूरा शहर “ॐ नमः शिवाय” तथा “हर-हर महादेव” के जयघोषों से गूंज उठा।
रविवार सुबह पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच रथोत्सव का शुभारंभ हुआ। हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री रमेश, मंत्री मदन तथा तिरुनेलवेली के जिला कलेक्टर ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया। इसके बाद हजारों श्रद्धालुओं ने लंबी रस्सियों को थामकर पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान नेल्लैयप्पर के विशाल रथ को नगर भ्रमण कराया।
लगभग 85 फीट ऊंचा और करीब 450 टन वजनी यह विशाल रथ देश के सबसे बड़े और भारी मंदिर रथों में गिना जाता है। इसकी विशेष संरचना ऐसी है कि चारों रथ मार्गों के किसी भी कोने से श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकते हैं। जैसे-जैसे रथ आगे बढ़ता गया, श्रद्धालु भगवान शिव के जयघोष करते हुए भक्ति में लीन दिखाई दिए। रथ पर सुसज्जित भगवान नेल्लैयप्पर और देवी कांतिमति अम्मन के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
नेल्लैयप्पर मंदिर का आणि महोत्सव तमिलनाडु के सबसे लंबे और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल है। सहायक मंदिरों के उत्सवों सहित यह आयोजन लगभग 40 दिनों तक चलता है। मुख्य महोत्सव की शुरुआत 20 जून को ध्वजारोहण के साथ हुई थी। इसके बाद प्रतिदिन विशेष पूजा, अभिषेक, आराधना, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शोभायात्राओं का आयोजन किया गया। महोत्सव के नौवें दिन आयोजित होने वाला रथोत्सव पूरे आयोजन का सबसे प्रमुख और आकर्षण का केंद्र माना जाता है।
पहले परंपरागत रूप से इस विशाल रथ को चारों रथ मार्गों की परिक्रमा कर पुनः अपने मूल स्थान तक पहुंचने में 10 से 15 दिन लग जाते थे। हालांकि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था के कारण अब रथोत्सव के दिन ही रथ की पूरी परिक्रमा कर उसे सुरक्षित रूप से उसके निर्धारित स्थान तक पहुंचा दिया जाता है।
रथोत्सव के दौरान जिला प्रशासन ने सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के व्यापक इंतजाम किए। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस, प्राथमिक उपचार केंद्र तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई। प्रशासन का पूरा ध्यान रथयात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने पर केंद्रित रहा।
उल्लेखनीय है कि कई शताब्दियों पुराने इतिहास वाला नेल्लैयप्पर-कांतिमति अम्मन मंदिर तिरुनेलवेली की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। द्रविड़ स्थापत्य शैली, विशाल रथोत्सव, प्राचीन धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक महत्व के कारण यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है। हर वर्ष आयोजित होने वाला यह भव्य रथोत्सव तमिलनाडु की समृद्ध धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतीक बनकर लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।———–
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