राम मंदिर चंदा चोरी महाविवाद: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में आज सबसे बड़ी सुनवाई, संतों ने की ट्रस्ट भंग करने की मांग, आरोपियों के घरों से मिला कुबेर का खजाना!

अयोध्या/नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालतों की दहलीज पर पहुंच चुका है। इस महाविवाद को लेकर आज का दिन बेहद सरगर्मियों भरा रहने वाला है। एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) और हाईकोर्ट (High Court) में इस पूरे घोटाले को लेकर दायर याचिकाओं पर अहम सुनवाई होनी है, वहीं दूसरी तरफ सियासत और संत समाज में भी भारी उबाल देखने को मिल रहा है। इस बीच, आज दान चोरी के सभी 8 आरोपियों की अदालत में पेशी भी होनी है।

 

 

 

 

अदालतों में आज आर-पार: CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग

 

राम मंदिर चंदे में वित्तीय हेराफेरी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है। इसके अलावा, हाईकोर्ट में भी दाखिल एक अन्य याचिका पर आज ही सुनवाई होनी है, जिसमें मंदिर ट्रस्ट के खातों का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा विशेष ऑडिट कराने और एक स्वतंत्र जांच कमेटी गठित करने की गुहार लगाई गई है।

 

 

 

 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी आरोपियों की पेशी, 14 दिन की रिमांड की तैयारी

 

चंदा चोरी के आरोप में गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों को आज अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के मुताबिक, अयोध्या पुलिस इन आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) की मांग नहीं करेगी। इसके बजाय, सुरक्षा और कानून व्यवस्था को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी आरोपियों को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत (Judicial Remand) के तहत सीधे जेल भेजने की अपील की जाएगी। इसके साथ ही, पुलिस इस केस से जुड़े कुछ अन्य संदिग्धों को नोटिस जारी कर सकती है और नए ठिकानों पर छापेमारी भी की जा सकती है।

 

 

 

 

“कोष में गड़बड़ी और कोषाध्यक्ष बरी?” – शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का PMO पर हमला

 

इस पूरे मामले पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बेहद तीखा और बड़ा बयान देकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा:

 

 

 

 

“इस कोष में बड़ी गड़बड़ी हुई है, लेकिन कोषाध्यक्ष को बरी रखा गया है। यह पूरी तरह से प्रधानमंत्री कार्यालय का मामला है, क्योंकि पीएमओ ने ही इस ट्रस्ट का निर्माण करवाया था। सरकारी खजाने से एक रुपया निकालकर यह ट्रस्ट बना, जिसमें उन्होंने चुन-चुनकर अपने लोग रखे और उन्हीं से सारा निर्माण व संचालन कराया। जितने बड़े गबन की बात की जा रही है, जिन लोगों के नाम FIR में हैं, वे इस कैलिबर के हैं ही नहीं। कानूनन इन्वेस्टिगेशन तो FIR के बाद शुरू होता है, तो फिर FIR से पहले ही SIT कैसे बन गई? सिर्फ ‘SIT बन गई’ का खूब दुष्प्रचार किया गया। आपकी ही सरकार है, आपका ही ट्रस्ट है और आपका ही मीडिया है। खुद नृपेन्द्र मिश्रा जी ने बताया था कि SIT मुख्यमंत्री के निर्देश पर काम करेगी। क्या मुख्यमंत्री के निर्देश पर कोई स्वतंत्र जांच कमेटी काम करती है?”

 

“नेशन नहीं, बीजेपी की नजर डोनेशन पर है” – अखिलेश यादव का तीखा तंज

 

संगम नगरी प्रयागराज के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “जो लोग पहले ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) का नारा देते थे, आज उनके लिए ‘डोनेशन फर्स्ट’ (Donation First) हो चुका है। भाजपा की निगाहें नेशन पर नहीं, बल्कि डोनेशन पर टिकी हैं।” अखिलेश यादव ने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी का स्पष्ट मानना है कि जिन लोगों ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा के साथ खिलवाड़ किया है, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के मंदिर में इतना बड़ा घोटाला हो जाए, ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता था।

 

 

 

 

अयोध्या के संतों में भारी आक्रोश: “तुरंत भंग हो राम मंदिर ट्रस्ट”

 

रामलला के दान में गबन का मामला सामने आने और पुलिसिया कार्रवाई के बाद अयोध्या का संत समाज बेहद गुस्से में है। अयोध्या के कई प्रतिष्ठित संतों ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे तुरंत भंग करने की मांग की है। संतों का कहना है कि वर्तमान ट्रस्ट को पूरी तरह बर्खास्त कर नए सिरे से इसका गठन किया जाए। संतों के मुताबिक, इस शर्मनाक प्रकरण ने दुनिया भर के करोड़ों सनातनियों और रामभक्तों की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ ट्रस्ट के ढांचे में व्यापक बदलाव बेहद जरूरी है।

 

 

 

 

वकीलों का बड़ा फैसला: “हम नहीं लड़ेंगे चंदा चोरों का केस”

 

इस मामले में आरोपियों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ने वाली हैं। सूत्रों के अनुसार, आज अयोध्या कचहरी में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा की अध्यक्षता में वकीलों की एक बेहद अहम और आपातकालीन बैठक होने जा रही है। इस बैठक में राम मंदिर दान चोरी के आरोपियों का केस न लड़ने पर सर्वसम्मति से फैसला लिया जा सकता है। अयोध्या के स्थानीय वकीलों का स्पष्ट रुख है कि वे भगवान राम के मंदिर में चोरी करने वाले आरोपियों की पैरवी अदालत में नहीं करेंगे।

 

छापेमारी खत्म: आरोपियों के घरों से मिला कुबेर का खजाना!

 

अयोध्या पुलिस द्वारा आरोपियों के विभिन्न ठिकानों पर की जा रही मैराथन छापेमारी अब समाप्त हो गई है। जांच सूत्रों के मुताबिक, इस तलाशी अभियान में पुलिस को आरोपियों के घरों से भारी मात्रा में कैश (नकदी), लाखों रुपये की सोने-चांदी की ज्वेलरी, बेहद महंगे लग्जरी सामान और रियल एस्टेट व विभिन्न योजनाओं में किए गए निवेश के दस्तावेज मिले हैं। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के परिजनों और उनके पड़ोसियों के बयान भी दर्ज किए हैं और परिजनों के व्यक्तिगत दस्तावेजों की भी बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है।

 

 

 

 

अपनों के बचाव में उतरे परिवार: बेकसूर होने का दावा

 

एक तरफ जहां जांच एजेंसियां शिकंजा कस रही हैं, वहीं आरोपियों के परिवार उन्हें बेकसूर बता रहे हैं।

 

 

 

 

रमाशंकर मिश्रा के परिजन: मुख्य आरोपियों में शामिल रमाशंकर मिश्रा के पिता और भाभी ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है और रमाशंकर को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। वह पिछले ढाई साल से घर से अलग किराये के कमरे में रह रहा था, हालांकि वह पिछले 6-7 सालों से राम मंदिर के कार्यों से जुड़ा हुआ था।

 

चंपत राय के परिजन: श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के कथित इस्तीफे की खबरों के बीच बिजनौर स्थित उनके पैतृक गांव से उनके भाई और मित्रों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। परिजनों का कहना है कि जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन और निर्माण के लिए अपना पूरा घर-परिवार और सरकारी नौकरी तक छोड़ दी, उन पर ऐसे घटिया और निराधार आरोप लगाना सरासर गलत है।

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