मध्यप्रदेश में डेढ़ साल के मासूम की आंखों की रोशनी जाने का मामला, एनएचआरसी ने लिया स्वतः संज्ञान

नई दिल्ली : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश के सागर जिले के बांदा सिविल अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण डेढ़ वर्षीय मासूम की आंखों की रोशनी चले जाने की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

 

रिपोर्ट के अनुसार, डेढ़ वर्षीय बच्चे को सर्दी और आंखों में लालपन की शिकायत होने पर परिजन उपचार के लिए बांदा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि उपचार के दौरान डॉक्टरों ने गलती से आंखों में डालने की दवा की जगह नाक में डालने वाली दवा (नेजल ड्रॉप्स) आंखों में डाल दी। इसके बाद बच्चे की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया और उसकी दृष्टि प्रभावित हो गई।

 

हालत बिगड़ने पर बच्चे को पहले जिला अस्पताल भेजा गया। वहां से उसे बेहतर इलाज के लिए एम्स भोपाल रेफर किया गया।

 

परिजनों का आरोप है कि एम्स में चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि संक्रमण के कारण बच्चे की आंखों की रोशनी वापस लाना संभव नहीं है।

 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने संज्ञान में कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह चिकित्सा सेवाओं में गंभीर लापरवाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला बनता है। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से पूरे घटनाक्रम, जांच की स्थिति, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तथा पीड़ित बच्चे को उपलब्ध कराए गए उपचार एवं सहायता के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने यह रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा है।

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