नई दिल्ली/तेहरान : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की गरिमामयी मौजूदगी को लेकर ईरान ने भारत सरकार और देश की जनता का दिल से आभार जताया है। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी गहरी मित्रता, सांस्कृतिक जुड़ाव और ऐतिहासिक संबंधों का एक अनमोल और अटूट प्रतीक बताया है।
ईरानी दूतावास ने ‘एक्स’ पर लिखा भावुक संदेश: मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहा भारत
ईरानी दूतावास ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक आधिकारिक बयान जारी कर भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। दूतावास ने लिखा, ‘भारत गणराज्य में स्थित इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का दूतावास भारत की मित्रवत सरकार और जनता, विशेष रूप से भारत सरकार की ओर से उपस्थित आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के प्रति हार्दिक आभार और प्रशंसा व्यक्त करता है। जिन्होंने हमारे शहीद नेता, महामहिम अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह में भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।’
दूतावास ने आगे कहा कि ईरान के लोग संकट और दुख की इस घड़ी में भारत द्वारा दिखाए गए सम्मान, मित्रता और करुणा के इस भाव को कभी नहीं भूलेंगे। इसे दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे मजबूत रिश्तों को भविष्य में और प्रगाढ़ करने के लिए एक अहम आधार माना जाएगा।
भारत की तरफ से इन दिग्गज नेताओं ने तेहरान पहुंचकर दी श्रद्धांजलि
तेहरान में आयोजित इस वैश्विक विदाई समारोह में भारत सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े चेहरों ने शिरकत की। भारत सरकार की ओर से विदेश मामलों की राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने आधिकारिक तौर पर देश का प्रतिनिधित्व किया।
इसके अलावा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी तेहरान पहुंचकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। वहीं, जम्मू और कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी इस विदाई समारोह का हिस्सा बनीं और ईरान के लोगों के साथ अपनी संवेदनाएं साझा कीं।
महबूबा मुफ्ती ने कहा: ‘हम हमेशा आपके साथ खड़े रहेंगे’
तेहरान से रवानगी के वक्त महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा, ‘इस गहरे दुख और शोक की घड़ी में मेरी संवेदनाएं ईरान के साहसी नेतृत्व और जुझारू जनता के साथ हैं। हम हमेशा आपके साथ खड़े रहेंगे। ईरानी सरकार का हार्दिक आभार, जिन्होंने इस मुश्किल समय में भी इतनी उदारता और गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया। यहां आना मेरे लिए सम्मान की बात है।’
क्या है पूरा मामला? जिसने बदल दी पश्चिम एशिया की कूटनीति
गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी (2026) को अमेरिकी-इस्राइली हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से पूरे पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और तनाव चरम पर है। उनके अंतिम विदाई समारोह में तेहरान की सड़कों पर लाखों की संख्या में शोक संतप्त लोग उमड़े थे। इस दौरान ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने खामेनेई की विरासत को आगे बढ़ाने और इस हमले के जिम्मेदार देशों से बदला लेने का संकल्प लिया।
खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को इस्लामी गणराज्य ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स (अल जजीरा) के मुताबिक, इस्राइल की ओर से लगातार मिल रही धमकियों और सुरक्षा कारणों के चलते नए सर्वोच्च नेता के इस छह दिवसीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से शामिल होने की संभावना बेहद कम है।
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