बेंगलुरु : कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहां के कामाक्षीपाल्या थाना क्षेत्र के कोटिगेपाल्या इलाके में शनिवार सुबह एक सनकी युवक ने घरेलू विवाद में हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। 34 वर्षीय एक बेरोजगार पूर्व ड्राइवर ने धारदार हथियार से हमला कर अपने ही परिवार के तीन सदस्यों की निर्मम हत्या कर दी। इस तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद जब पड़ोसियों ने आरोपी को कमरे में बंद कर दिया, तो उसने अंदर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इस खौफनाक वारदात से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
कहासुनी के बाद खूनी संघर्ष: बीच-बचाव करने वालों को भी नहीं बख्शा
पुलिस तफ्तीश के मुताबिक, मूल रूप से मागडी तहसील के ब्यालकेरे का रहने वाला यह परिवार पिछले 7-8 सालों से कोटिगेपाल्या में किराए के मकान में रह रहा था। शनिवार सुबह करीब 8 बजे घर के भीतर अचानक चीख-पुकार मच गई। किसी बात को लेकर 34 वर्षीय प्रशांत की अपने 50 वर्षीय बहनोई सतीश (पेशे से प्लंबर) से तीखी बहस हो गई।
देखते ही देखते प्रशांत के सिर पर खून सवार हो गया और उसने घर में रखे धारदार हथियार से सतीश पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए। सतीश की दर्दनाक चीख सुनकर उसकी 55 वर्षीय मां मंगलम्मा और 75 वर्षीय बुजुर्ग नानी नंजम्मा तुरंत बीच-बचाव करने दौड़ीं। लेकिन सनकी प्रशांत ने उन दोनों पर भी बेरहमी से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में तीनों पीड़ितों ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
पड़ोसियों की सूझबूझ: हत्यारे को कमरे में किया बंद, लेकिन…
घर के अंदर से आ रही चीख-पुकार और शोर सुनकर आसपास के पड़ोसी तुरंत मौके पर पहुंचे। घर का खौफनाक मंजर देखकर लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। पड़ोसियों ने हिम्मत और सूझबूझ दिखाते हुए हत्यारे प्रशांत को भागने का मौका नहीं दिया। उन्होंने प्रशांत को तुरंत एक कमरे के अंदर धकेला और बाहर से कुंडी लगा दी।
इसके बाद मकान मालिक और पड़ोसियों ने तुरंत कामाक्षीपाल्या थाना पुलिस को सूचित किया। लेकिन जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती, कमरे में बंद प्रशांत ने अंदर फंदे से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। पुलिस ने जब दरवाजा तोड़ा तो प्रशांत का शव पंखे से लटका मिला।
मां-नानी मेहनत कर चलाती थीं घर, आरोपी था बेरोजगार
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रशांत पहले ड्राइविंग का काम करता था, लेकिन पिछले करीब एक साल से वह पूरी तरह बेरोजगार था और कोई काम नहीं कर रहा था। घर का खर्च चलाने के लिए उसकी मां मंगलम्मा एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करती थीं, जबकि 75 वर्षीय बुजुर्ग नानी नंजम्मा इस उम्र में भी सफाई का काम कर परिवार का हाथ बंटाती थीं। आशंका जताई जा रही है कि इसी बेरोजगारी और पारिवारिक कलह के चलते प्रशांत ने इस आत्मघाती कदम को अंजाम दिया।
पिता का दर्द: ‘सुबह दुकान न जाता तो मैं भी मारा जाता’
इलाके में ही कपड़े प्रेस (लॉन्ड्री) की दुकान चलाने वाले प्रशांत के पिता चिक्कण्णा इस हादसे के बाद से पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने रोते हुए पुलिस को बताया कि प्रशांत बेहद गुस्सैल स्वभाव का था और अक्सर घर में विवाद करता था।
चिक्कण्णा का बयान: “मैं रोज की तरह सुबह जल्दी अपनी दुकान के लिए निकल गया था। अगर मैं उस वक्त घर पर मौजूद होता, तो प्रशांत निश्चित रूप से मुझे भी मार डालता। सुबह दुकान जाने की वजह से ही आज मेरी जान बच पाई है, लेकिन मेरा पूरा परिवार उजड़ गया।”
पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है कि आखिर शनिवार सुबह ऐसा क्या हुआ जिसने प्रशांत को इतना बड़ा हैवान बना दिया।
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