नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि सरकार का मानना है कि जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की जरूरत है. मंत्री ने कहा कि गरीब की जाति, भाषा और क्षेत्र नहीं होती है. आरक्षण की मांग के मुद्दे पर पर गडकरी ने कहा कि अगर किसी समुदाय को आरक्षण मिल भी जाता है तो क्या होगा. नौकरियां हैं नहीं. गौरतलब है कि मंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मराठा आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में 16 प्रतिशत आरक्षण मिले. संविधान में आरक्षण का प्रावधान जाति के आधार पर है न की आर्थिक आधार पर.
केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने रविवार को कहा कि आरक्षण रोजगार देने की गारंटी नहीं है क्योंकि नौकरियां कम हो रही हैं. गडकरी ने कहा कि एक ‘सोच’ है जो चाहती है कि नीति निर्माता हर समुदाय के गरीबों पर विचार करें. गडकरी महाराष्ट्र में आरक्षण के लिए मराठों के वर्तमान आंदोलन और अन्य समुदायों द्वारा इस तरह की मांग से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे. वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, ‘मान लीजिए कि आरक्षण दे दिया जाता है. लेकिन नौकरियां नहीं हैं. क्योंकि बैंक में आईटी के कारण नौकरियां कम हुई हैं. सरकारी भर्ती रूकी हुई है. नौकरियां कहां हैं?’
उन्होंने कहा, ‘एक सोच कहती है कि गरीब गरीब होता है, उसकी कोई जाति, पंथ या भाषा नहीं होती. उसका कोई भी धर्म हो, मुस्लिम, हिन्दू या मराठा (जाति), सभी समुदायों में एक धड़ा है जिसके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं है, खाने के लिए भोजन नहीं है. उन्होंने कहा, ‘एक सोच यह कहती है कि हमें हर समुदाय के अति गरीब धड़े पर भी विचार करना चाहिए.
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में आरक्षण की मांग कर रहे मराठा राज्य में आर्थिक उदारीकरण चाहते हैं. उनका कहना है कि राज्य की नौकरियों में दूसरे समुदाय के लोगों का आधिपत्य है और उनके समुदाय के लोगों के पास कम सरकारी नौकरियां हैं. हालांकि महाराष्ट्र में मराठा कम्यूनिटी एक मजबूत और संपन्न कम्यूनिटी है. 32 फीसदी लोग इसी समुदाय से आते हैं. यह समुदाय राज्य में अपने स्तर पर पूरी तरह स्थापित है.
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