भोपाल : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष और ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह को पद से हटा दिया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।
इस कार्रवाई की पुष्टि मध्य प्रदेश सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने गुरुवार काे की। सरकार के इस फैसले के बाद प्रशासनिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
उपभोक्ता संरक्षण नियमों के तहत कार्रवाई
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप सचिव द्वारा राज्य उपभोक्ता आयोग के रजिस्ट्रार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि गिरिबाला सिंह के विरुद्ध दर्ज प्रकरण को देखते हुए उपभोक्ता संरक्षण नियम-2020 के उप नियम 9(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस प्रावधान में पद से हटाने के साथ जांच की प्रक्रिया का भी उल्लेख है। विभाग ने मामले की विस्तृत जांच कर शीघ्र प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शासन स्तर पर जांच प्रक्रिया को तेज करने के संकेत भी दिए गए हैं।
दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद भोपाल के कटारा हिल्स थाने में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। गिरिबाला सिंह फिलहाल अग्रिम जमानत पर हैं। वहीं मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह अभी फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की हैं। पहले उस पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया। विदेश भागने की आशंका को देखते हुए लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है।
हाई कोर्ट पहुंचा मामला
इधर, भोपाल की निचली अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद समर्थ सिंह ने गुरुवार काे जबलपुर उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। जिस पर 22 मई को सुनवाई हो सकती है। दूसरी ओर ट्विशा शर्मा के परिवार ने भी उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है। परिवार की ओर से समर्थ सिंह को अग्रिम जमानत न दिए जाने, गिरिबाला सिंह की जमानत निरस्त करने तथा मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग उठाई जा रही है।
‘7 लाख रुपये ट्रांसफर’ का दावा
उच्च न्यायालय में दायर जमानत याचिका में समर्थ सिंह ने दहेज मांग के आरोपों को गलत बताया है। याचिका में दावा किया गया है कि उन्होंने और उनकी मां ने कथित तौर पर ट्विशा शर्मा के खातों में 7 लाख रुपये से अधिक की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर की थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा प्रस्तुत व्हाट्सएप चैट अधूरे और एडिटेड हैं तथा उनमें छेड़छाड़ की गई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कथित ऑडियो टेप से बढ़ी चर्चा
मामले में हाल ही में एक कथित ऑडियो क्लिप सामने आने का दावा भी किया गया है। इसमें गिरिबाला सिंह और ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा के बीच बातचीत होने की बात कही जा रही है। बातचीत में गिरिबाला सिंह ट्विशा के मेजर भाई से ट्विशा शर्मा के पुराने रिश्तों और उनकी निजी जिंदगी को लेकर सवाल पूछ रही हैं। हालांकि इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने ट्विशा शर्मा केस को पारिवारिक विवाद से आगे बढ़ाकर प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक बहस का विषय बना दिया है। अब सभी की नजर शासन द्वारा गठित जांच और हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर टिकी हुई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी विवाद31 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं। दिसंबर 2025 में उनकी शादी मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता बेटे समर्थ सिंह के साथ हुई थी। परिजनों के अनुसार 12 मई की रात ट्विशा ने फोन पर परिवार को बताया था कि ससुराल में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और नौकरी छोड़ने को लेकर अपमानित किया जाता है। इसके कुछ समय बाद परिवार को उनकी मौत की सूचना मिली। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया, जबकि मायके पक्ष ने हत्या और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। ट्विशा का पोस्टमार्टम भोपाल एम्स में कराया गया था, लेकिन पीड़ित परिवार ने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की थी। हालांकि भोपाल जिला अदालत ने दूसरी पोस्टमार्टम याचिका खारिज कर दी।
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