चेन्नई : तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित सियासी भूचाल आ गया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) को अब तक का सबसे बड़ा और करारा झटका लगा है। पार्टी के सबसे वरिष्ठ स्तंभों में से एक और तमिलनाडु विधानसभा के पूर्व स्पीकर पी. धनपाल (P. Dhanapal) ने अन्नाद्रमुक की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यह है कि धनपाल ने पार्टी छोड़ने का यह ऐतिहासिक फैसला ठीक उसी दिन लिया, जब उनके बेटे और रासिपुरम सीट से नवनिर्वाचित विधायक डी. लोगेश तमिलसेल्वन ने अभिनेता से राजनेता बने ‘थलापति’ विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) की नई सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली।
मौजूदा नेतृत्व ने पुराने वफादारों को कुचला राजभवन से निकलते ही झलका धनपाल का दर्द
चेन्नई स्थित राजभवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद जैसे ही पूर्व स्पीकर पी. धनपाल बाहर निकले, मीडियाकर्मियों के कैमरों के सामने उनका बरसों पुराना दर्द और आक्रोश फूट पड़ा। अन्नाद्रमुक के मौजूदा शीर्ष नेतृत्व (पलानीसामी गुट) पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए धनपाल ने कहा:
आज बड़े भारी मन से मैं उस पार्टी को छोड़ रहा हूं जिसे मैंने अपने खून-पसीने से सींचा था। मौजूदा नेतृत्व ने मुझे और मेरे जैसे कई अन्य पुराने वफादार साथियों को पूरी तरह से नजरअंदाज और दरकिनार कर दिया है। जिन लोगों ने पार्टी के शुरुआती दिनों (एमजीआर और जयललिता के दौर) से लेकर अब तक का सफर देखा और इसे मजबूत किया, आज उन्हें ही किनारे लगा दिया गया। लेकिन समय का चक्र घूमता है, आज जनता और खुद पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं ने इस अहंकारी नेतृत्व को इग्नोर (नकार) कर दिया है।”
40 साल का राजनीतिक सफर, 7 बार के विधायक और पूर्व स्पीकर का जाना बड़ी क्षति
पी. धनपाल का शुमार तमिलनाडु के उन कद्दावर दलित नेताओं में होता है, जिनकी जमीनी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। उनका राजनीतिक करियर 40 साल से भी ज्यादा पुराना है।
वे रिकॉर्ड सात बार तमिलनाडु विधानसभा के सदस्य (विधायक) चुने जा चुके हैं।
दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के बेहद भरोसेमंद रहे धनपाल साल 2012 से 2021 तक लगातार तमिलनाडु विधानसभा के गरिमामयी पद ‘स्पीकर’ (अध्यक्ष) रहे।
इसके अलावा उन्होंने अन्नाद्रमुक की विभिन्न सरकारों में आदिवासी कल्याण, सहकारिता, खाद्य और नागरिक आपूर्ति जैसे बेहद महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं।
टीवीके (TVK) की नई सरकार में बेटे का उदय, पिता का राजनीतिक संन्यास?
राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि एक तरफ जहां अन्नाद्रमुक गर्त में जा रही है, वहीं धनपाल के बेटे डी. लोगेश तमिलसेल्वन ने ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (टीवीके) का दामन थामकर अपनी नई राजनीतिक इबारत लिख दी है। विजय की सरकार में उन्हें बेहद महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा गया है। जानकारों का कहना है कि धनपाल भले ही खुद किसी अन्य दल में शामिल न हों, लेकिन उनका इस्तीफा अन्नाद्रमुक के कोर दलित वोट बैंक को पूरी तरह से हिलाकर रख देगा।
अन्नाद्रमुक में मची भगदड़: सेम्मलाई के बाद धनपाल के इस्तीफे से पलानीसामी अलग-थलग
यह इस्तीफा AIADMK के लिए कोई सामान्य घटना नहीं है। चुनाव में करारी हार झेलने के बाद पार्टी पहले से ही अंदरूनी कलह और नेतृत्व संकट से जूझ रही है। कुछ दिनों पहले ही पूर्व मंत्री एस. सेम्मलाई ने भी पार्टी के तानाशाही रवैये पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा दे दिया था। अब धनपाल जैसे कद्दावर और ग्रासरूट स्तर पर लोकप्रिय नेता के जाने से अन्नाद्रमुक में वरिष्ठ नेताओं की भारी कमी हो गई है।
इस इस्तीफे ने पार्टी के भीतर सुलग रहे असंतोष को ज्वालामुखी की तरह बाहर ला दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अन्नाद्रमुक के अन्य नाराज सीनियर नेता भी अब विजय की ‘टीवीके’ या द्रमुक (DMK) का रुख करेंगे? यदि वर्तमान नेतृत्व ने अपनी गलतियों को सुधारने के लिए तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो तमिलनाडु की राजनीति से जयललिता की इस ऐतिहासिक पार्टी का वजूद पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
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