नई दिल्ली : यूट्यूबर ध्रुव राठी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि उनका एक यूट्यूब वीडियो है। वीडियो का शीर्षक है “Can Hindus Eat Beef? Kerala Story 2 Exposed”। इस वीडियो को लेकर अब मामला सीधे दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। सवाल सिर्फ एक वीडियो का नहीं है, बल्कि धार्मिक भावनाओं, सोशल मीडिया की जिम्मेदारी और कानून की प्रक्रिया का भी है। तो आइए, पूरे मामले को शुरुआत से समझते हैं।
आखिर विवाद शुरू कैसे हुआ?
21 मार्च 2026 को ध्रुव राठी ने यह वीडियो अपलोड किया। वीडियो में उन्होंने हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए प्राचीन भारत में खान-पान और मांसाहार पर चर्चा की। इसी दौरान भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े कुछ संदर्भ भी दिए गए। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित चर्चा बताया, जबकि कई लोगों ने आरोप लगाया कि इससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
शिकायत किसने की?
दिल्ली की अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने इस वीडियो पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं के बारे में ऐसे दावे किए गए हैं जो न सिर्फ अपमानजनक हैं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने सबसे पहले यूट्यूब के शिकायत निवारण अधिकारी के पास शिकायत की, लेकिन जब वहां से संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो मामला केंद्र सरकार की ग्रिवेंस अपीलेट कमेटी (GAC) तक पहुंच गया।
फिर हाईकोर्ट जाने की जरूरत क्यों पड़ी?
यहीं से कहानी में नया मोड़ आया। शिकायतकर्ता का कहना था कि GAC के पास अपील लंबित होने के बावजूद लंबे समय तक कोई फैसला नहीं आया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि या तो वीडियो हटाने का आदेश दिया जाए या फिर GAC को जल्द फैसला लेने के निर्देश दिए जाएं।
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि अगर किसी डिजिटल कंटेंट से समाज में तनाव पैदा होने या किसी समुदाय की आस्था को ठेस पहुंचने की आशंका हो, तो उस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी है कि ऐसे कंटेंट पर समय रहते उचित कार्रवाई करें।
वहीं, गूगल की ओर से कहा गया कि मामला पहले से ही GAC के पास विचाराधीन है और वही इस पर फैसला लेने का वैधानिक मंच है। इसलिए समिति के निर्णय का इंतजार किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल वीडियो हटाने का कोई आदेश नहीं दिया। अदालत ने केवल इतना कहा कि ग्रिवेंस अपीलेट कमेटी इस मामले में 15 दिनों के भीतर फैसला सुनाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
अब आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर GAC पर टिकी है। समिति को यह तय करना होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर वीडियो को हटाया जाए या नहीं। अगर किसी भी पक्ष को समिति का फैसला स्वीकार नहीं होता, तो मामला एक बार फिर अदालत तक पहुंच सकता है।
यानी फिलहाल ध्रुव राठी का वीडियो ऑनलाइन है, लेकिन अगले 15 दिन इस पूरे विवाद के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। अब देखना होगा कि शिकायत अपीलीय समिति क्या फैसला सुनाती है और इस बहुचर्चित विवाद का अगला अध्याय क्या होगा।
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