फर्जी वेबसाइटों पर भारत सख्त, गाेडैडी ने कहा- फैसले से इंटरनेट और यूजर्स की प्राइवेसी पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी डोमेन रजिस्ट्रार कंपनियों में शामिल गाेडैडी ने फर्जी वेबसाइटों के खिलाफ भारत की सख्त कार्रवाई को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि अदालत के नए निर्देश लागू होने से इंटरनेट की सुरक्षा, यूजर्स की निजता और वैध कारोबार प्रभावित हो सकते हैं।

 

मीडिया रिपाेर्ट के अनुसार, मामला दिसंबर 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अमेज़न, मैकडॉनल्ड्स, माइक्रोसॉफ्ट, श्याओमी और कोलगेट-पामोलिव सहित कई कंपनियों की शिकायतों पर 1,100 से अधिक फर्जी वेबसाइटों को ब्लॉक करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने इसके साथ डोमेन रजिस्ट्रेशन और पहचान संबंधी नियमों को भी कड़ा करने के निर्देश दिए थे।

 

अदालत के आदेश के अनुसार, डोमेन रजिस्ट्रार कंपनियां अब डिफॉल्ट रूप से मुफ्त प्राइवेसी प्रोटेक्शन उपलब्ध नहीं कराएं, डोमेन मालिकों की जानकारी वैध हित रखने वाले आवेदकों को 72 घंटे के भीतर उपलब्ध कराएं और प्रसिद्ध ब्रांडों से मिलते-जुलते डोमेन नामों की बिक्री पर रोक लगाएं।

 

गाेडैडी ने अपनी अपील में कहा है कि इन निर्देशों से वेबसाइट मालिकों के नाम, पता, फोन नंबर और ईमेल जैसी निजी जानकारी सार्वजनिक होने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे उन्हें उत्पीड़न, स्टॉकिंग और साइबर हमलों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी का यह भी कहना है कि “वैध हित” की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने के कारण यह तय करना संभव नहीं होगा कि किसे रजिस्ट्रेशन संबंधी जानकारी दी जाए।

 

कंपनी ने तर्क दिया कि डोमेन नेम सिस्टम वैश्विक स्तर पर संचालित होता है, इसलिए भारत के इन नियमों का असर दुनिया भर के इंटरनेट संचालन पर पड़ सकता है। गाेडैडी का कहना है कि यदि ऐसे निर्देश लागू किए गए तो कुछ डोमेन सेवा प्रदाताओं को भारत में अपना कारोबार सीमित करने या बंद करने पर भी विचार करना पड़ सकता है।

 

गाेडैडी ने यह भी दावा किया कि मुफ्त प्राइवेसी प्रोटेक्शन हटाना भारत के डेटा संरक्षण कानून और यूरोपीय संघ के जीडीपीआर जैसे अंतरराष्ट्रीय गोपनीयता मानकों के अनुरूप नहीं है, जो “प्राइवेसी बाय डिफॉल्ट” की अवधारणा को बढ़ावा देते हैं।

 

दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि फर्जी वेबसाइटों और डोमेन के दुरुपयोग के कारण साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। गृह मंत्रालय ने अदालत में कहा कि जांच एजेंसियों के लिए डोमेन रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध होना आवश्यक है। गृह मंत्री अमित शाह भी हाल ही में साइबर अपराध को देश के लिए गंभीर चुनौती बता चुके हैं।

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