Prayagraj : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। एनडीए गठबंधन का अहम हिस्सा और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान आज संगम नगरी प्रयागराज पहुंच रहे हैं। वह ऐतिहासिक परेड मैदान से उत्तर प्रदेश में पार्टी के चुनावी अभियान का धमाकेदार आगाज करने जा रहे हैं। युवाओं को केंद्र में रखकर यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले या गठबंधन के तहत अपनी सियासी जमीन मजबूत करने उतरी एलजेपी (आर) के इस कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
परेड मैदान में ‘यूथ बोले टू’ से युवाओं से सीधा संवाद
शाम 4 बजे से शुरू होने वाले इस मेगा ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान युवाओं, छात्रों और आम जनता से सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान वह युवाओं के तीखे सवालों का सामना करेंगे और उनके भविष्य, शिक्षा, रोजगार तथा डिजिटल युग की चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा करेंगे। पार्टी का यह विशेष अभियान देश की नई पीढ़ी यानी Gen-Z को सीधे तौर पर राजनीतिक बहसों और नीतियों से जोड़ने की एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
15 हजार कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा, दिग्गजों की रहेगी मौजूदगी
प्रयागराज के परेड ग्राउंड में आयोजित इस विशाल कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। कार्यक्रम में प्रयागराज, कौशांबी और आसपास के दर्जनों जिलों से 15 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं और युवाओं के जुटने का दावा किया गया है। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर समर्थकों का पहुंचना शुरू हो चुका है। इस भव्य आयोजन में एलजेपी (आर) के यूपी प्रभारी और जमुई सांसद अरुण भारती समेत पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक और नेता विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया पर बेबाक बयान
प्रयागराज दौरे से ठीक पहले राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि सरकार का हिस्सा होने के नाते उनका उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था का आंख मूंदकर बचाव करना नहीं है, लेकिन विपक्ष के राजनीतिक बयानों से इतर चुनाव आयोग को जनता के मन में उठ रही शंकाओं का समाधान जरूर करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि आम जनता का चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से भरोसा उठने लगे, तो यह देश के लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है, इसलिए आयोग को पूरी मजबूती के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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