जुबीन गर्ग हत्याकांड के तीन आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

गुवाहाटी : जुबीन गर्ग हत्याकांड में तीन आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई। असम के कामरूप जिले की जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए 30 जनवरी को आदेश सुनाने की तिथि निर्धारित की है।

 

जिन आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई, उनमें अमृतप्रभा महंत, परेश वैश्य और नंदेश्वर बोरा शामिल हैं। अदालत 30 जनवरी को इन तीनों की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगी।

 

सुनवाई के दौरान श्यामकानु महंत और संदीपन गर्ग के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि वे फिलहाल जमानत नहीं चाहते हैं, जिसके बाद उनकी ओर से दायर जमानत याचिकाएं वापस ले ली गईं।

 

यह सुनवाई सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुई, जहां जुबीन की पत्नी गरिमा गर्ग और बहन पामी बरठाकुर भी उपस्थित रहीं।

 

उल्लेखनीय है कि, जुबीन गर्ग हत्याकांड में कुल पांच आरोपित श्यामकानु महंत, अमृतप्रभा महंत, संदीपन गर्ग, नंदेश्वर बोरा और परेश वैश्य ने जमानत की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था, जिनमें से तीन की याचिकाओं पर आज सुनवाई पूरी हुई।

 

बता दें कि, 19 सितंबर, 2025 को दिवंगत जुबिन गर्ग (52) एक यॉट पार्टी में शामिल थे। उन्हें अगले दिन सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में परफॉर्म करना था। इसी दौरान वह समुद्र में तैरने उतरे और फिर वापस नहीं लौट सके। कोर्ट में पेश मुख्य जांच अधिकारी ने बताया कि जुबिन गर्ग ने शुरुआत में लाइफ जैकेट पहनी, लेकिन बाद में उतार दिया था। इसके बाद जब उन्हें दूसरी, छोटी लाइफ जैकेट दी गई तो उन्होंने उसे पहनने से इनकार कर दिया। वो उस समय बहुत ज्यादा नशे में थे। गवाहों ने बताया कि जुबिन गर्ग यॉट की ओर तैरकर लौटने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तभी वह बेहोश हो गए। पानी में मुंह के बल तैरने लगे। उन्हें तुरंत यॉट पर वापस लाया गया और सीपीआर दिया गया।

 

इस केस में एसआईटी की चार्जशीट में दिवंगत गायक के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और बैंडमेट शेखरज्योति गोस्वामी को मर्डर का आरोपित बताया गया है। वहीं, जुबीन गर्ग के रिश्तेदार और सस्पेंडेड असम पुलिस ऑफिसर संदीपन गर्ग पर गैर-इरादतन हत्या का चार्ज लगाया गया है। यह सुनवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि असम पुलिस द्वारा बनाई गई एसआईटी ने केस में चार्जशीट दाखिल कर पांच लोगों की कथित भूमिका का जिक्र किया है। वहीं, सभी आरोपितों ने आरोपों से इनकार करते हुए खुद को बेगुनाह बताया है। आरोपितों ने बेल की अर्जी उस समय दी जब सिंगापुर पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जुबीन गर्ग की मौत में किसी तरह की साजिश के सबूत नहीं मिले हैं और उनकी मौत डूबने से हुई थी।

 

मामले में सिंगापुर पुलिस ने यह भी कहा कि घटना से थोड़ी देर पहले जुबीन गर्ग यॉट पर काफ़ी ज्यादा नशे में थे। गवाहों के मुताबिक, यॉट पर रहते हुए जुबीन गर्ग ने शराब पी थी। एक गवाह ने बताया कि उन्होंने जिन, व्हिस्की समेत कई कप शराब पी थी और गिनीज स्टाउट के भी कुछ सिप्स लिए थे। जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि जुबीन पहले तैरने के लिए पानी में गए, फिर वापस यॉट पर आए और कहा कि वह थक गए हैं। इसके कुछ मिनट बाद वह दोबारा पानी में चले गए। जांच के दौरान जुबीन गर्ग की मेडिकल हिस्ट्री भी देखी गई। कोर्ट को बताया गया कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और एपिलेप्सी यानी मिर्गी की बीमारी थी और मिर्गी का आखिरी अटैक 2024 में आया था। फॉरेंसिक जांच में उनके खून में दोनों बीमारियों की दवाएं पाई गईं।

 

हालांकि, यह साफ नहीं हो पाया कि घटना वाले दिन उन्होंने मिर्गी की दवा ली थी या नहीं, क्योंकि इस पर गवाहों के बयान क्लियर नहीं थे।फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट ने गवाही में कहा कि ऐसे कोई फिजिकल साइन नहीं मिले, जिससे यह साबित हो सके कि पानी में जाने से पहले उन्हें मिर्गी का दौरा पड़ा था। इस मामले में यॉट के कैप्टन क्रेजी मंकी ने भी कोर्ट में बयान दिया है।

 

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