नई दिल्ली : पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद पहले गणतंत्र दिवस पर भारतीय वायु सेना ने अपने फ्लाई पास्ट में ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन में विमान उड़ाए। इस फॉर्मेशन में दो राफेल, दो सुखोई-30 और दो मिग-29 के साथ एक जगुआर फाइटर जेट भी शामिल हुआ। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयरबेस बर्बाद करने वाले लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करके इस फॉर्मेशन में उड़ान भरकर वायु सेना ने अपनी हवाई ताकत का प्रदर्शन किया।
कर्तव्य पथ पर हर साल गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य आकर्षण फ्लाई पास्ट होता है, जिसमें वायु सेना के विमानों की गड़गड़ाहट की गूंज से पूरा माहौल थर्रा जाता है। वायु सेना इस फ्लाई पास्ट में हर साल नए-नए प्रयोग करती रही है। वायु सेना के विंग कमांडर राजेश देशवाल ने बताया कि इस बार गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दिखाई गई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ फॉर्मेशन पाकिस्तान के खिलाफ पिछले साल मई में की गई सटीक सैन्य कार्रवाई की ताकत का प्रतीक है। ये तीन फॉर्मेशन्स गरुड़, प्रहार और सिंदूर फॉर्मेशन हैं। इस फ्लाई पास्ट में छह अलग-अलग हवाई अड्डों से उड़ान भरकर कुल 29 विमानों ने हिस्सा लिया। इसमें 16 फाइटर एयरक्राफ्ट्स, 4 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स और 9 हेलीकॉप्टर हैं।
गणतंत्र दिवस परेड में सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मु को तिरंगा फहराने में सहयोग करने वाली फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ कहती हैं कि परेड शुरू होने से पहले राष्ट्रपति के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का मौका मिलना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ भारतीय वायु सेना की कोशिश नहीं थी, बल्कि सभी सशस्त्र बलों के लिए अपनी ताकत दिखाने का मौका था।गणतंत्र दिवस पर फ्लाईपास्ट, परेड और तीनों सेनाओं की मार्चिंग टुकड़ियों को देखना युवाओं के लिए प्रेरणा की बात है और उन्हें देश की वायु सेना में शामिल होने के लिए हिम्मत देने जैसा है।
गणतंत्र दिवस में भारतीय वायुसेना के फ्लाई पास्ट के दौरान देश के अग्रणी दो राफेल जेट, दो मिग-29, दो एसयू-30 और एक जगुआर विमान ने ‘सिंदूर’ नामक संयोजन बनाकर उड़ान भरी। आकाश में विमानों का यह संयोजन पिछले साल मई में पाकिस्तान के साथ चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के दौरान दिखाई दिया था। फ्लाई पास्ट के दौरान सिंदूर, ध्वज, प्रहार, गरुड़, अर्जन, वरुण और वज्रांग सहित विभिन्न प्रकार की संरचनाएं प्रदर्शित की गईं। फ्लाई पास्ट में ऑपरेशन सिंदूर का ध्वज भी फहराया गया, जो 7 से 10 मई तक पाकिस्तान के खिलाफ भारत की पूरी सटीकता के साथ तीनों सशस्त्र बलों के सैन्य अभियान की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है।
विंग कमांडर राजेश देशवाल ने बताया कि फ्लाई पास्ट में शामिल होने वाले अन्य विमानों में एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच), अपाचे हेलीकॉप्टर, भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री निगरानी विमान और एमआई-17 हेलीकॉप्टर थे। आठ अलग-अलग फॉर्मेशन मेंयह फ्लाई पास्ट ‘ध्वज’ फॉर्मेशन के साथ शुरू हुआ। इस फॉर्मेशन में चार एमआईमी-17 हेलीकॉप्टर ने हिस्सा लिया, जिसमें सबसे आगे वाले हेलीकॉप्टर में राष्ट्रीय ध्वज और बाकी तीन में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के ध्वज थे। दूसरे फॉर्मेशन ‘प्रहार’ में तीन एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) थे, जिसमें एक हेलीकॉप्टर ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ का झंडा लेकर उड़ान भरी।
फ्लाई पास्ट में एक खास ‘स्पियरहेड’ फॉर्मेशन भी थी। भाले रूपी हथियार की इस फॉर्मेशन में वायु सेना के राफेल, सुखोई-30 और मिग-29 फाइटर जेट के साथ एक जगुआर फाइटर जेट ने भी हिस्सा लिया। ये चारों वे फाइटर जेट हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा लिया था। इस बार का फ्लाई-पास्ट दो चरण में हुआ, जिसमें पहला चरण कर्तव्य पथ पर वायु सेना के मार्चिंग दस्ते के समय सिंदूर फॉर्मेशन में दिखाई दिया। दूसरा चरण मार्च पास्ट खत्म होने के बाद हुआ, जिसमें राफेल लड़ाकू विमान मुख्य आकर्षण रहा। वायु सेना के मार्चिंग-दस्ते में 114 वायु योद्धा शामिल हुए, जिसका नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर जगदेश कुमार ने किया। उनके साथ स्क्वाड्रन लीडर निकिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश भी थे।
एयर कमोडोर मनीष सभरवाल ने बताया कि गणतंत्र दिवस परेड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ दिखाने वाली झांकी में दिखाया गया कि तीनों सेनाओं ने मिलकर यह ऑपरेशन कैसे किया। झांकी में दिखाया गया कि सुखोई-30 से ब्रह्मोस लॉन्च करके कैसे पाकिस्तान के एक एयरबेस को तबाह कर दिया गया। झांकी में एयर डिफेंस एस-400 को भी दिखाया गया,जिसने दुनिया की सबसे लंबी रेंज से पाकिस्तानी एयरफोर्स के एक हथियार को मार गिराया था। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड राष्ट्रीय एकता का एक शक्तिशाली प्रतीक है, जो भारत की सैन्य शक्ति और तकनीकी प्रगति को प्रदर्शित करता है।
वायु सेना के मिलिट्री बैंड में पहली बार पुरुषों के साथ महिला अग्निवीरों को भी शामिल किया गया। वायु सेना बैंड का नेतृत्व सार्जेंट चार्ल्स एंटनी डेनियल ने करके मार्चिंग दस्ते का उत्साहवर्धन किया। इस बैंड में 72 बेहतरीन म्यूजिशियन शामिल रहे, जिनमें 57 पुरुष अग्निवीरऔर 9 महिला अग्निवीर के साथ 3 ड्रम मेजर ने भी हिस्सा लिया। राष्ट्रपति के सलामी मंच के सामने से गुजरने पर बैंड ने ‘साउंड बैरियर’ धुन बजाकर वायु सेना की बहुमुखी प्रतिभा और इसके आधुनिक स्वरूप को प्रदर्शित किया।
इस वर्ष के पूर्व सैनिकों की झांकी का विषय ‘संग्राम से राष्ट्र निर्माण तक’ का अनावरण था। झांकी के अगले हिस्से में अमर जवान ज्योति और ऐतिहासिक युद्ध मशीनों के 3डी मॉडल प्रदर्शित किए गए, जिनमें टी-55 और विजयंत टैंक, हंटर, मिग-21, मिराज और जगुआर विमान तथा आईएनएस मैसूर और आईएनएस राजपूत शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें 1965 और 1971 के युद्धों और 1999 के कारगिल ऑपरेशन विजय के चित्रण भी शामिल हैं। झांकी के पिछले हिस्से ने पूर्व सैनिकों की भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसमें बाढ़ राहत,चिकित्सा सेवाओं, शिक्षा और ‘मेक इन इंडिया’ पहल में उनके स्वैच्छिक प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया।———————
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