100 से ज्यादा राफेल विमान खरीदने की तैयारी में भारत, देश में ही बनेंगे 80 फीसदी लड़ाकू विमान

रक्षा बजट में बढ़ोतरी के बाद भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर सकती है। यह प्रस्ताव लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये का है और इसे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के फरवरी के तीसरे सप्ताह में भारत दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय में चर्चा के लिए लाया जा सकता है। रक्षा खरीद बोर्ड (डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड) से इस प्रस्ताव को पिछले महीने ही शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर अगले सप्ताह एक उच्चस्तरीय बैठक में विचार किया जा सकता है। मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए इसे वायुसेना की दीर्घकालिक जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि वर्तमान में वायुसेना के पास करीब 30 फाइटर स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन है।

 

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान-बांग्लादेश और पाकिस्तान-चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकियों के कारण खतरे की धारणा और मजबूत हुई है। इस पृष्ठभूमि में 4.5 पीढ़ी के उन्नत मल्टीरोल लड़ाकू विमान राफेल को वायुसेना की लंबी अवधि की जरूरतों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। इस परियोजना के तहत खरीदे जाने वाले 114 राफेल विमानों में से करीब 80 प्रतिशत का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसमें फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच सहयोग होगा। योजना के अनुसार वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान मिलेंगे, जिनमें अधिकांश भारत में ही बनाए जाएंगे।

 

इस सौदे के पूरा होने पर भारतीय वायुसेना के पास कुल 150 राफेल विमान होंगे। इसके अलावा भारतीय नौसेना के पास भी 26 राफेल विमान होंगे, जो विशेष रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने के लिए अनुकूल होंगे। राफेल एक अत्याधुनिक 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशनों में सक्षम है। यह लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों, सटीक हथियार प्रणालियों, अत्याधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस है और किसी भी मौसम व जटिल परिस्थितियों में प्रभावी है।

 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 18 फरवरी को दिल्ली में प्रस्तावित एआई समिट में शामिल होने की संभावना है, और इससे पहले इस रक्षा सौदे पर चर्चा को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

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